फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   navratri 2015 skandmata puja

नवरात्र के पांचवें दिन ऐसे करें मां की पूजा, मनोकामना होती है पूरी

Sat, 17 Oct 2015 07:41 AM IST
Updated Sat, 17 Oct 2015 07:41 AM IST
विज्ञापन
navratri 2015 skandmata puja

नवरात्र का पांचवें दिन मां दुर्गा के नौ रुपों में से स्कंदमाता रुप की पूजा होती है। स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। माता अपने दो हाथों में कमल पुष्प धारण किए हुए है और एक हाथ से कुमार कार्तिकेय को गोद लिए हुए हैं।

विज्ञापन


देवी स्कंदमाता का वाहन सिंह है। यह देवी दुर्गा का ममतामयी रूप है। जो भक्त मां के इस स्वरूप का ध्यान करता है उस पर मां ममता की वर्षा करती हैं और हर संकट एवं दुःख से भक्त को मुक्त कर देती है।
विज्ञापन


संतान सुख की इच्छा से जो व्यक्ति मां स्कंदमाता की आराधना करना चाहते हैं उन्हें नवरात्र की पांचवी तिथि को लाल वस्त्र में सुहाग चिन्ह सिंदूर, लाल चूड़ी, महावर, नेल पेंट, लाल बिन्दी तथा सेब और लाल फूल एवं चावल बांधकर मां की गोद भरनी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

खास तरह के लाभ पाने के ल‌िए ऐसे करें मां की पूजा

navratri 2015 skandmata puja

स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए स्कंद कुमार को खुश करना जरूरी है क्योंकि जबतक संतान खुश नहीं होगी मां खुश नहीं हो सकती है। मां को खुश करने के लिए पंचवी तिथि को पांच वर्ष की पांच कन्याओं एवं पांच बालकों को खीर एवं मिठाई खिलाएं। भोजन के पश्चात कन्याओं को लाल चुनरी एवं कम से कम 5 रुपये दें तथा बालकों को एक सेब एवं 5 रुपये दें।

कहते हैं कि गला एवं वाणी क्षेत्र पर स्कंदमाता का प्रभाव होता है। इसलिए जिन्हें गले में किसी प्रकार की तकलीफ अथवा वाणी दोष हैं उन्हें गंगाजल में पांच लवंग मिलाकर स्कंदमाता का आचमन कराना चाहिए और इसे प्रसाद स्वरूप पीना चाहिए। यह उपाय उनके लिए भी लाभकारी है जो गायन, एंकरिंग अथवा अन्य वाणी से संबंधित पेशे से जुड़े हुए हैं।

स्कंद माता का ध्यान मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रित करद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कंद माता यशस्विनी॥

स्‍कंदमाता की पूजा का रहस्‍य

navratri 2015 skandmata puja
नवरात्र के पांचवें दिन देवी स्कंदमाता की पूजा होती है। शास्त्रों में स्कंद, कुमार कार्तिकेय को कहा गया है। कुमार कार्तिकेय की माता देवी पार्वती हैं। एक बार इन्द्र ने कार्तिकेय का उपहास उड़ाना शुरु किया और बताया कि आप भगवान शिव और माता पार्वती की संतान नहीं हैं।


इससे कुमारा कार्तिकेय बहुत दुःखी हुए। माता ने कार्तिकेय का दुःख समझ लिया और सिंह पर सवार होकर प्रकट हो गई। मां ने अपनी गोद में कार्तिकेय को उठाकर दुलार किया और इन्द्र पर कुपित हुई।

इन्द्र भय से कांपने लगे और माता से क्षमा याचना करने लगे। इसके बाद माता ने इन्द्र को माफ कर दिया। इसके बाद देवताओं ने कुमार कार्तिकेय की माता के रुप में देवी पार्वती की पूजा की। देवी पार्वती की लीलाओं में यह पांचवी लीला है इसलिए नवरात्र के पांचवें दिन देवी स्कंदमाता की पूजा होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed