भौम प्रदोष व्रत पर शिव पूजा से करें मंगल दोष का उपचार

राकेश/इंटरनेट डेस्क। Updated Mon, 10 Dec 2012 05:47 PM IST
mangal dosha remedy from pradosh vrat
प्रत्येक मास की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत का विधान है। प्रदोष व्रत भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किया जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि वार के अनुसार प्रदोष व्रत का अलग-अलग फल मिलता है। शनिवार के दिन जब प्रदोष व्रत पड़ता है तब शनि प्रदोष व्रत कहलता है। इस प्रकार मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। शनिवार और मंगलवार के प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है।

11 दिसम्बर को मंगलवार है और इस दिन त्रयोदशी तिथि भी है। इससे भौम प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्यास्त से रात्रि आरंभ होने तक का समय प्रदोष काल कहलाता है। इस समय भगवान शिव की पूजा करने से भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।  इसका कारण यह माना जाता है कि त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा नृत्य करते हैं। इस समय इनकी पूजा करने से शिव अति प्रसन्न होते हैं।

भौम प्रदोश व्रत के दिन शिव की पूजा करने से मंगल ग्रह के कारण प्राप्त होने वाले अशुभ ग्रहों के प्रभाव में कमी आती है। आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है और शरीर उर्जावान एवं शक्तिशाली होता है। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत होने से इस दिन संध्या के समय हनुमान चालीसा के पाठ का भी कई गुणा लाभ मिलता है। मंगल दोष के प्रभाव को कम करने के लिए इस दिन मसूर की दाल, लाल वस्त्र, गुड़, तांबा का दान करना उत्तम फलदायी होता है।

मंगल की शांति के लिए जो लोग प्रदोष व्रत करना चाहते है उनके लिए नियम यह है कि पूरे दिन व्रत रखकर शाम के समय भगवान शिव एवं हनुमान जी की पूजा करें। हनुमान जी को बूंदी के लड्डू अथवा बूंदी अर्पित करके लोगों में प्रसाद बांटें। इसके बाद भोजन करें। 

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