Makar Sankranti 2022 : मकर संक्रांति के त्योहार पर जानिए इससे जुड़ी खास बातें...
Makar Sankranti 2022 : उत्तर भारत में मकर संक्रांति को बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। यहां पर इसे खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का दान और खिचड़ी का भोजन किया जाता है।
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Makar Sankranti 2022: सूर्यदेव लगभग एक महीने के अंतराल पर राशि बदलते हैं। जब सूर्य धनु से निकलकर मकर राशि की अपनी यात्रा आरंभ करते हैं इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। साल में कुल मिलाकर 12 संक्रांतियां आती हैं जिसमें मकर संक्रांति का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति का पर्व हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण आ जाते हैं जिसका विशेष महत्व होता है। उत्तरायण को देवता का दिन कहा जाता है। मकर संक्रांति पर सभी पवित्र नदियों में स्नान, दान, जाप करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन काला तिल, तिल से बने लड्डू, हरी सब्जियां, फल और खिचड़ी का दान किया जाता है। मकर संक्रांति का त्योहार देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नाम से मनाया जाता है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति का क्या है महत्व।
मकर संक्रांति/ खिचड़ी
Khichdi 2022: उत्तर भारत में मकर संक्रांति को बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। यहां पर इसे खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का दान और खिचड़ी का भोजन किया जाता है। इस दिन से प्रयागराज में माघ मेला और कल्पवास शुरू हो जाता है। मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की प्रथा है। माना जाता है तभी से यह त्योहार खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है।
मकर संक्रांति/ पौष संक्रांति
Poush Sankranti 2022: मकर संक्रांति को पौष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। पौष माह में संक्रांति पड़ने के कारण इसको पौष संक्रांति कहा जाता है। पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति के त्योहार को पौष संक्रांति के रूप में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन गंगासागर में स्नान करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और डूबकी लगाकर सूर्यदेव को जल अर्पित करते हैं। स्नान के बाद गरीबों और जररूतमंदों को काले तिल का दान किया जाता है।
मकर संक्रांति/ उत्तरायण
Uttarayan 2022: मकर संक्रांति पर सूर्य दक्षिणायन की अपनी यात्रा समाप्त करते हुए उत्तरायण दिशा में चलने लगते हैं। ऐसे में इस दिन को उत्तराण के पर्व के रूप में मनाया जाता है। गुजरात में मकर संक्रांति के त्योहार को सूर्य उत्तरायण के नाम से मनाते हैं। इस दिन पतंग उड़ाने की परंपरा होती है।
मकर संक्रांति/ मकर संक्रमण
मकर संक्रांति को मकर संक्रमण के नाम से दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन दान, पूजा-पाठ और स्नान का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रामण का अर्थ होता है सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में आते हैं तो इस काल को संक्रामण काल कहा जाता है। 14 और 15 जनवरी को सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे कर्नाटक में मकर संक्रमण के नाम से जाना जाता है।
मकर संक्रांति/ बिहू
Bihu festival: मकर संक्रांति को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में विशेषकर असम में इस दिन को बिहू त्योहार के रूप में मनाया जाता है। बिहू का त्योहार नई फसलों के तैयार होने की खुशी में मनाया जाता है। बिहू के अवसर यहां के लोग लोक नृ्त्य और भोजन बनाया जाता है।
मकर संक्रांति/ पोंगल
Pongal 2022: मकर संक्रांति को तमिलनाडू में पोंगल के रूप मनाया जाता है। इस दिन सूर्य उपासना करते हुए सूर्य भगवान को खीर का भोग लगाया जाता है।
मकर संक्रांति/ लोहड़ी
Lohri 2022: मकर संक्रांति के एक दिन पहले दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी के रूप मनाया जाता है। लोहड़ी का त्योहार नई फसलों की खुशी में मनाया जाने वाला त्योहार है।