magh purnima 2021: माघी पूर्णिमा पर दान का बत्तीस गुना फल, जानिए कथा और व्रत पूजा विधि
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हर माह जब चंद्रमा बढ़ते हुए पूर्ण हो जाता है, तब पूर्णिमा तिथि आती है। पूर्णिमा तिथि हर माह पड़ती है, इस बार माघ मास की पूर्णिमा तिथि 26 फरवरी को पड़ रही है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान-दक्षिणा का बत्तीस गुना फल प्राप्त होता है। इसलिए इस बत्तीसी पूर्णिमा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माघी पूर्णिमा के दिन स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं, इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना का बहुत महत्व माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के पूजन और व्रत करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं माघ पूर्णिमा व्रत की कथा और व्रत पूजा विधि...
माघ पूर्णिमा व्रत कथा
कथा के अनुसार कांतिका नगर में धनेश्वर नाम का ब्राह्मण निवास करता था। वह अपना जीवन निर्वाह दान पर करता था। ब्राह्मण और उसकी पत्नी के कोई संतान नही थी। एक दिन उसकी पत्नी नगर में भिक्षा मांगने गई, लेकिन सभी ने उसे बांझ कहकर भिक्षा देने से इनकार कर दिया। तब किसी ने उससे 16 दिन तक मां काली की पूजा करने को कहा। उसके कहे अनुसार ब्राह्मण दंपत्ति ने ऐसा ही किया। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर 16 दिन बाद मां काली प्रकट हुई। मां काली ने ब्राह्मण की पत्नी को गर्भवती होने का वरदान दिया और कहा कि अपने सामर्थ्य के अनुसार प्रत्येक पूर्णिमा को तुम दीपक जलाओ। इस तरह हर पूर्णिमा के दिन तक दीपक बढ़ाती जाना जब तक कम से कम 32 दीपक न हो जाएं।
ब्राह्मण ने अपनी पत्नी को पूजा के लिए पेड़ से आम का कच्चा फल तोड़कर दिया। उसकी पत्नी ने पूजा की और फलस्वरूप वह गर्भवती हो गई। प्रत्येक पूर्णिमा को वह मां काली के कहे अनुसार दीपक जलाती रही। मां काली की कृपा से उनके घर एक पुत्र ने जन्म लिया, जिसका नाम देवदास रखा। देवदास जब बड़ा हुआ तो उसे अपने मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेजा गया। काशी में उन दोनों के साथ एक दुर्घटना घटी जिसके कारण धोखे से देवदास का विवाह हो गया। देवदास ने कहा कि वह अल्पायु है परंतु फिर भी जबरन उसका विवाह करवा दिया गया। कुछ समय बाद काल उसके प्राण लेने आया लेकिन ब्राह्मण दंपत्ति ने पूर्णिमा का व्रत रखा था, इसलिए काल उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाया। इस कथा के अनुसार सच्चे मन से पूर्णिमा के दिन व्रत करने से संकट से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पूर्णिमा व्रत विधि
- माघ पूर्णिमा के दिन प्रातः किसी भी पवित्र नदी में स्नान करें यदि न कर सकें तो पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें।
- स्नान करने पश्चात तांबे के लोटे में जल में रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- इसके बाद भगवान श्री हरि विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद दिन में यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें।
- शाम को विष्णु जी का पूजन करें और चंद्रमा को अर्घ्य दें।