फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Magh Gupt Navratri 2023 Date Kalash sthapna muhurt and vidhi in Hindi

Magh Gupt Navratri 2023: आज से सिद्धि योग में शुरू होगी माघ गुप्त नवरात्रि, जानें कलश स्थापना मुहूर्त और विधि

Sun, 22 Jan 2023 08:12 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 22 Jan 2023 08:12 AM IST
सार

माघ गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ 22 जनवरी दिन रविवार से हो रहा है। गुप्त नवरात्रि को गुप्त साधना और विद्याओं की सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

विज्ञापन
Magh Gupt Navratri 2023 Date Kalash sthapna muhurt and vidhi in Hindi
सिद्धि योग में शुरू होगी माघ गुप्त नवरात्रि - फोटो : amar ujala

विस्तार

Magh Gupt Navratri 2023: आज से गुप्त नवरात्रि शुरू होगी। हिन्दू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। साल में चार नवरात्रि पड़ती हैं। जिसमें प्रकट रूप से एक चैत्र नवरात्रि तथा आश्विन माह की शारदीय नवरात्रि और गुप्त रूप से माघ और आषाढ़ माह में नवरात्रि आती हैं। इस साल माघ गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ 22 जनवरी दिन रविवार से हो रहा है। गुप्त नवरात्रि को गुप्त साधना और विद्याओं की सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। माघ गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ माघ शुक्ल प्रतिपदा से होता है, जो नवमी तिथि तक होती है। इस साल माघ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 22 जनवरी को और नवमी तिथि 30 जनवरी को है। आइए जानते हैं कलश स्थापना विधि और मुहूर्त के बारे में। 

विज्ञापन


सिद्धि योग में होगी गुप्त नवरात्रि आरंभ 
22 जनवरी को माघ गुप्त नवरात्रि का आरंभ सिद्धि योग में होगा। प्रातः 10:06 बजे तक वज्र योग है और उसके बाद से सिद्धि योग लगेगा। सिद्धि योग अगले दिन यानि 23 जनवरी को प्रातः 05:41 बजे तक है। 
विज्ञापन


कलश स्थापना मुहूर्त
22 जनवरी को माघ गुप्त नवरात्रि के कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त में की जाएगी।  इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक है।

कलश स्थापना विधि 

  • घर के उत्तर पूर्व दिशा में कलश की स्थापना करें।  
  • कलश स्थापना से पूर्व उस जगह कोअच्छे से स्वच्छ कर लें। 
  • इसके बाद उसे गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।  
  • अब इस जगह पर कलश रखें और उस पर स्वास्तिक का चिह्न बनाएं और सिंदूर का टीका लगाएं।  
  • कलश के मुख पर कलावा बांधे।  
  • अब आप जिस स्थान पर कलश स्थापना करने जा रहे हैं, उसे हाथ को स्पर्श करते हुए  'ॐ भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धर्त्रीं, पृथिवीं यच्छ पृथिवीं दृग्वंग ह पृथिवीं मा हि ग्वंग सीः' मंत्र का उच्चारण करें।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • इसके बाद कलश रखने वाले स्थान पर सप्तधान बिछाते हुए  ' ॐ धान्यमसि धिनुहि देवान् प्राणाय त्यो दानाय त्वा व्यानाय त्वा, दीर्घामनु प्रसितिमायुषे धां देवो वः सविता हिरण्यपाणिः प्रति गृभ्णात्वच्छिद्रेण पाणिना चक्षुषे त्वा महीनां पयोऽसि' का उच्चारण करें। 
  • अब कलश को स्थापित करते हुए 'ॐ  आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दव:, पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः' मंत्र का उच्चारण करें। 
  • अब कलश को मिट्टी के दीये से ढक दें और उसके ऊपर नारियल आर चावल भरकर रख दें। 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed