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Kumbh Mela 2019 : अभी खत्म नहीं हुआ है कुंभ, इन प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालु लगा सकेंगे पुण्य की डुबकी
Sat, 16 Feb 2019 12:03 PM IST
Madhukar Mishra
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Madhukar Mishra
Updated Sat, 16 Feb 2019 12:03 PM IST
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प्रयागराज कुंभ 2019
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प्रयागराज कुंभ में मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी के पावन पर्व प्रमुख शाही स्नान के बाद अभी भी कुंभ मेले की रौनक बाकी है। माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के पावन पर एक विशेष घड़ी में श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगा सकते हैं।
माघी पूर्णिमा — 19 फरवरी 2019 — पर्व स्नान
प्रयागराज कुंभ में माघ महीने की पूर्णिमा में इस स्नान का बहुत महत्व है। माघ की इसी पूर्णिमा के दिन संगम की रेती पर चलने वाला कल्पवास खत्म होगा। जिसे पूर्ण करने के पश्चात् श्रद्धालु अपने एक महीने की इस साधना का पुण्यफल पाने के लिए संगम में विशेष डुबकी लगाते हैं। मौनी अमावस्या की तरह माघ की पूर्णिमा का स्नान भी पुण्य फल प्रदान करने वाली है।
महाशिवरात्रि : 4 मार्च 2019 — पर्व स्नान
संगम की रेती पर आस्था का यह महामेला मकर संक्रांति से शुरु होकर महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होता है। इस तरह एक पवित्र घड़ी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं के लिए महाशिवरात्रि का पर्व अंतिम मौका होगा। भगवान शिव के इस पावन व्रत के दिन सुदूर कंदराओं, पहाड़ों और दुर्गम स्थानों से निकलकर आनेवाले साधु-संत और माघ मेले में कल्पवास करने वाले कल्पवासी अपने-अपने स्थान को वापस लौट जाएंगे।
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माघी पूर्णिमा — 19 फरवरी 2019 — पर्व स्नान
प्रयागराज कुंभ में माघ महीने की पूर्णिमा में इस स्नान का बहुत महत्व है। माघ की इसी पूर्णिमा के दिन संगम की रेती पर चलने वाला कल्पवास खत्म होगा। जिसे पूर्ण करने के पश्चात् श्रद्धालु अपने एक महीने की इस साधना का पुण्यफल पाने के लिए संगम में विशेष डुबकी लगाते हैं। मौनी अमावस्या की तरह माघ की पूर्णिमा का स्नान भी पुण्य फल प्रदान करने वाली है।
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महाशिवरात्रि : 4 मार्च 2019 — पर्व स्नान
संगम की रेती पर आस्था का यह महामेला मकर संक्रांति से शुरु होकर महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होता है। इस तरह एक पवित्र घड़ी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं के लिए महाशिवरात्रि का पर्व अंतिम मौका होगा। भगवान शिव के इस पावन व्रत के दिन सुदूर कंदराओं, पहाड़ों और दुर्गम स्थानों से निकलकर आनेवाले साधु-संत और माघ मेले में कल्पवास करने वाले कल्पवासी अपने-अपने स्थान को वापस लौट जाएंगे।
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