यहां चौरासी खंभों में बीच हैं भगवान विष्णु का सिंहासन

टीम डिजिटल Updated Tue, 26 Nov 2013 02:54 PM IST
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भगवान विष्णु की तस्वीरों को आमतौर पर आपने शेषनाग की शैय्या पर लेटा हुआ देखा होगा। लेकिन भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण जो मानव रूप में धरती पर पधारे थे उनका सिंहासन एक शिला का बना हुआ था।
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कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे इसलिए इनके सिंहासन को विष्णु का सिंहासन का जाता है। यह सिंहासन मथुरा से 50 किलोमीटर की दूरी पर कामां जिसे काम्यवन कहा जाता है वहां के प्रसिद्घ मंदिर श्री वृंदादेवी के पास स्थित हैं।
माना जाता है कि यहां देवताओं और असुरों ने मिलकर 168 खंभों का निर्माण करवाया था जिसका उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। अब यह स्थान 84 खंभों वाले मंदिर से नाम से जाना जाता हलांकि खंभों की संख्या 84 से भी कम हो चुकी है।
विष्णु पुराण में बताया गया है कि काम्यवन में चौरासी कुण्ड, चौरासी मन्दिर तथा चौरासी खम्बे वर्तमान हैं। यहां के कुण्डों को तीर्थ की मान्यता प्राप्त है। जिनमें स्नान करने मात्र से सभी प्रकार की कामना पूरी हो जाती है।

क्योंकि गोपियों ने इन कुंडों में स्नान किया था जिससे कृष्ण के प्रति उनके प्रेम की कामना पूरी हुई थी। भक्ति और मोक्ष की कामना रखने वालों के लिए इन कुंडों में स्नान करना उत्तम फलदायी माना गया है।
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