जब ब्रह्मा जी पर संकट आया तब कालरात्रि ने बचाए ब्रह्मा के प्राण

Rakesh Jhaराकेश कुमार झा Updated Mon, 19 Oct 2015 06:53 AM IST
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नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के नौ रूपों में से सातवें रूप कालरात्रि की पूजा होती है। इस देवी का स्वरूप सभी देवियों में भयंकर है। लेकिन भक्तों के लिए माता बहुत ही कल्याणकारी होने के लिए शुभंकरी भी कहलाती हैं।
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पुराणों में जिक्र आया है कि स्याह रात्रि के समान माता का स्वरूप काला है। कालारात्रि माता गले में विद्युत की माला धारण करती हैं। इनके बाल खुले हुए हैं और यह गर्दभ की सवारी करती हैं।
माता के हाथ में कटा हुआ सिर है जिससे रक्त टपकता रहता है। भयंकर रूप होते हुए भी माता भक्तों के लिए कल्याणकारी है। देवी भाग्वत् में कालरात्रि को आदिशक्ति का तमोगुण स्वरूप बताया गया इसलिए इन्हें काली भी कहा जाता है।
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मनुष्य के जीवन को इस तरह प्रभाव‌ित करती है कालरात्र‌ि

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