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संतान की लंबी आयु के लिए आज का व्रत उत्तम

Fri, 27 Sep 2013 08:08 AM IST
टीम डिजिटल
टीम डिजिटल Updated Fri, 27 Sep 2013 08:08 AM IST
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jeevitputrika vrat katha

आज आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा है कि यह दिन बड़ा ही उत्तम है। इस दिन जो माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं, उनकी संतान के जीवन पर आने वाला संकट टल जाते है और संतान का वियोग नहीं सहना पड़ता है।

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इसलिए इस दिन माताओं को निर्जल रहकर पूरे दिन व्रत रखना चाहिए और जिमूतवाहन भगवान की पूजा करनी चाहिए। क्योंकि इस दिन के देवता जिमूतवाहन भगवान हैं। जिमूतवाहन के विषय में एक रोचक कथा है।
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जीमूतवाहन व्रत कथा
एक बार जीमूतवाहन गंधमादन पर्वत पर भ्रमण कर रहे थे उसी समय उनके कानों में एक वृद्ध स्त्री के रोने की आवाज आई। जीमूतवान ने महिला के पास जाकर रोने का कारण पूछा तो उसने कहा कि मैं शंखचूड़ नाग की माता हूं। आज भगवान विष्णु का वाहन गरूड़ शंखचूड़ को उठा कर ले जाएगा औ खा जाएगा। इसलिए दु:खी होकर रो रही हूं।
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जिमूतवाहन ने कहा कि मैं आज आपके पुत्र के बदले गरूड़ का आहार बनूंगा और आपके पुत्र की रक्षा करूंगा। गरूड़ जब शंखचूड़ को लेने आया तो जिमूतवाहन शंखचूड़ बनकर बैठ गया। गरूड़ जीमूतवाहन को लेकर उड़ चला। लेकिन कुछ दूर जाने के बाद उसे एहसास हुआ कि वह शंखचूड़ की जगह एक मानव को उठा लाया है।

गरूड़ ने पूछा कि हे मानव तुम कौन हो और मेरा भोजन बनने क्यों चले आए। इस पर जिमूतवाहन ने कहा कि वह राजा जिमूतवाहन है। शंखचूड़ की माता को पु़त्र वियोग से बचाने के लिए मैं आपका आहार बनने चला आया। गरूड़ राजा के दया औरर परोपकार की भावना से प्रसन्न हो गए। जिमूतवान को वरदान दिया कि तुम सौ वर्ष तक पृथ्वी का राज भोगकर बैकुंठ जाओगे।


जिमूतवाहन के कारण शंखचूड़ की माता को पुत्र वियोग का दर्द नहीं सहना पड़ा। जिस दिन यह घटना हुई थी उस दिन आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि थी। इसलिए इस दिन से जीमूमतवान और जीवितपुत्रिका व्रत करने का विधान शुरू हो गया।

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