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Jagannath Rath Yatra 2025: जगन्नाथ पुरी धाम जहां विज्ञान भी रह जाए हैरान, जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें
Wed, 25 Jun 2025 10:49 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 25 Jun 2025 10:49 AM IST
सार
Jagannath Rath Yatra 2025: ओडिशा के समुद्र तट पर स्थित यह धाम भगवान श्रीकृष्ण के जगन्नाथ स्वरूप को समर्पित है, जहां साथ में बलभद्र और सुभद्रा की भी पूजा होती है। हर वर्ष यहां आयोजित होने वाली रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
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जगन्नाथ रथ यात्रा 2025
- फोटो : PTI
विस्तार
Jagannath Rath Yatra 2025: भारत के चार प्रमुख धामों में एक जगन्नाथ पुरी न केवल अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि अपने अद्भुत रहस्यों और चमत्कारों के लिए भी प्रसिद्ध है। ओडिशा के समुद्र तट पर स्थित यह धाम भगवान श्रीकृष्ण के जगन्नाथ स्वरूप को समर्पित है, जहां साथ में बलभद्र और सुभद्रा की भी पूजा होती है। हर वर्ष यहां आयोजित होने वाली रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। परंतु यह केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ऐसा स्थान है जहां विज्ञान के सारे नियम भी निरुत्तर हो जाते हैं।
शिखर पर लगा झंडा – इस मंदिर के शिखर पर लहराता झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में रहता है। ऐसा क्यों होता है आज तक कोई नहीं जान सका। यह झंडा प्रतिदिन बदला जाता है और यह सेवा किसी न किसी सेवायत द्वारा बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मंदिर की ऊंचाई तक चढ़कर पूरी की जाती है।
हवा का रुख है उलटा – सामान्यतः समुद्र तट पर दिन में हवा ज़मीन की तरफ आती है और शाम को समुद्र की ओर लौट जाती है। लेकिन पुरी में यह नियम उलट है- हवा दिन में समुद्र की ओर और रात को मंदिर की ओर बहती है।
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खाना पकने की बात करती है हैरान – मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए सात बर्तन एक दूसरे पर रखे जाते हैं। आश्चर्य की बात है कि सबसे ऊपर रखा बर्तन सबसे पहले पकता है, जबकि नीचे की आंच उसे सबसे बाद में छूती है। यह विधि आज भी वैसी की वैसी जारी है।
नहीं सुनाई देती है लहरों की आवाज – मंदिर के सिंह द्वार से प्रवेश करने पर समुद्र की लहरों की आवाज पूरी तरह शांत हो जाती है। लेकिन जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर निकलते हैं, लहरों की तेज आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई देती है। इसे मंदिर की वास्तुकला का चमत्कार माना जाता है।
इन सभी चमत्कारों और रहस्यों के कारण जगन्नाथ पुरी धाम केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभव है, जहाँ आस्था और अद्भुतता दोनों अपने चरम पर दिखाई देती हैं।
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शिखर पर लगा झंडा – इस मंदिर के शिखर पर लहराता झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में रहता है। ऐसा क्यों होता है आज तक कोई नहीं जान सका। यह झंडा प्रतिदिन बदला जाता है और यह सेवा किसी न किसी सेवायत द्वारा बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मंदिर की ऊंचाई तक चढ़कर पूरी की जाती है।
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हवा का रुख है उलटा – सामान्यतः समुद्र तट पर दिन में हवा ज़मीन की तरफ आती है और शाम को समुद्र की ओर लौट जाती है। लेकिन पुरी में यह नियम उलट है- हवा दिन में समुद्र की ओर और रात को मंदिर की ओर बहती है।
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चक्र हमेशा दिखता है सीधा – मंदिर के ऊपर स्थित सुदर्शन चक्र, जो लगभग 20 फीट व्यास का है, चाहे आप किसी भी दिशा से इसे देखें, यह सदैव आपको सामने सीधा ही नजर आता है। यह इतनी सटीकता से स्थापित किया गया है कि इसकी बनावट और दृष्टिकोण विज्ञान को भी सोचने पर मजबूर कर देती है।खाना पकने की बात करती है हैरान – मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए सात बर्तन एक दूसरे पर रखे जाते हैं। आश्चर्य की बात है कि सबसे ऊपर रखा बर्तन सबसे पहले पकता है, जबकि नीचे की आंच उसे सबसे बाद में छूती है। यह विधि आज भी वैसी की वैसी जारी है।
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नहीं उड़ता है कोई विमान और पक्षी – जगन्नाथ मंदिर की यह बात आपको आश्चर्य में डाल देगी कि मंदिर की गुम्बद के ऊपर से न तो कभी कोई विमान गुज़रता है और न ही इसके ऊपर कोई पक्षी बैठता या उड़ता हुआ नजर आता है। यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है।नहीं सुनाई देती है लहरों की आवाज – मंदिर के सिंह द्वार से प्रवेश करने पर समुद्र की लहरों की आवाज पूरी तरह शांत हो जाती है। लेकिन जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर निकलते हैं, लहरों की तेज आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई देती है। इसे मंदिर की वास्तुकला का चमत्कार माना जाता है।
इन सभी चमत्कारों और रहस्यों के कारण जगन्नाथ पुरी धाम केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभव है, जहाँ आस्था और अद्भुतता दोनों अपने चरम पर दिखाई देती हैं।
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