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गुरु तेग बहादुर धर्म की खातिर अपना सर्वोच्च बलिदान देकर कहलाए हिंद की चादर
Sun, 20 Dec 2020 11:18 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रुस्तम राणा
Updated Sun, 20 Dec 2020 11:18 AM IST
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श्री गुरु तेग बहादुर
- फोटो : सोशल मीडिया
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रविवार की सुबह अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में स्थित गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब का दौरा किया। यहां उन्होंने धर्म के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि दी। गुरु तेग बहादुर सिख धर्म के नौवें गुरु थे। उन्हें 'हिन्द की चादर' कहा जाता है। उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। धर्म के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान दिवस को शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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पंजाब के अमृतसर में हुआ था जन्म
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विश्व इतिहास में धर्म और मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है। गुरु तेग बहादुर का जन्म पंजाब के अमृतसर में गुरु हरगोबिन्द साहिब जी के घर हुआ था। बचपन में उनका नाम त्यागमल था। वे बाल्यकाल से ही धार्मिक, निर्भीक, विचारवान और दयालु स्वभाव के थे।
इस्लाम को कबूलने से किया था मना
सन् 1675 में धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर ने अपना बलिदान दिया था। मुगल बादशाह औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को मौत की सजा सुनाई थी क्योंकि गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम धर्म को अपनाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद मुगल बादशाह के आदेश पर सबके सामने गुरु जी का सिर कलम कर दिया गया था।
दिल्ली में स्थित है उनका शहीद स्थल
दिल्ली स्थित गुरुद्वारा शीश गंज साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उनके सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक स्थल हैं। दरअसल, गुरु तेगबहादुर की याद में उनके शहीदी स्थल पर जो गुरुद्वारा बना है, उसे गुरुद्वारा शीश गंज साहिब के नाम से जाना जाता है।
महान और क्रांतिकारी युग पुरुष
यह गुरुजी के निर्भय आचरण, धार्मिक अडिगता और नैतिक उदारता का उच्चतम उदाहरण था। गुरुजी मानवीय धर्म एवं वैचारिक स्वतंत्रता के लिए अपनी महान शहादत देने वाले एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे। गुरु जी ने धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए कई जगहों की यात्राएं की।