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गोपाष्टमी पर्व: गाय की पूजा करने से सभी देवी-देवता हो जाते हैं प्रसन्न

Fri, 12 Nov 2021 02:26 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 12 Nov 2021 02:26 PM IST
सार

गौ माता के रोम-रोम में तैतीस कोटि देवी-देवताओं एवं समस्त तीर्थों का वास है। भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने सर्वप्रथम कार्तिक शुक्ल अष्टमी से गायों को चराना प्रारंभ किया, तभी से गोपाष्टमी पर्व का प्रारंभ हुआ। इस साल यह पर्व 12 नवंबर,शुक्रवार को है।

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gopashtami 2021 date time significance and importance
गोपाष्टमी 2021: धर्मग्रंथ बताते है कि समस्त देवी-देवताओं और पितरों को एक साथ प्रसन्न करना हो तो गौ-भक्ति,गौ-सेवा से बढ़कर कोई अनुष्ठान नहीं है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोपाष्टमी पर्व यानि की गायों की सुरक्षा, संवर्धन एवं उनकी सेवा के संकल्प का ऐसा महापर्व जिसमें सत्वगुणी, अपने सानिध्य से दूसरों का पालन करने वाली, सम्पूर्ण सृष्टि को पोषण प्रदान करने वाली गाय माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु गाय-बछड़ों का पूजन किया जाता है। गाय, श्री कृष्ण को अतिप्रिय है,गौ पृथ्वी का प्रतीक है। गौ माता के रोम-रोम में तैतीस कोटि देवी-देवताओं एवं समस्त तीर्थों का वास है। भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने सर्वप्रथम कार्तिक शुक्ल अष्टमी से गायों को चराना प्रारंभ किया, तभी से गोपाष्टमी पर्व का प्रारंभ हुआ। इस साल यह पर्व 12 नवंबर,शुक्रवार को है।
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कैसे करें पूजा
भागवत पुराण के अनुसार इस दिन बछड़े सहित गाय माता की पूजा करने का विधान है। सुबह स्नान करने के बाद साफ़ और सात्विक रंग के वस्त्र पहन कर पूजन की थाली में धूप,दीप,गंध,पुष्प,अक्षत,रोली,गुड़,वस्त्र आदि लेकर गाय-बछड़े का पूजन करें,आरती उतारें और इसके बाद गायों को गो-ग्रास,मीठे चावल,मीठी रोटी गुड़ आदि खिलाएं। मान्यता है कि गाय की परिक्रमा करके गायों के साथ कुछ दूरी तक चलना भी चाहिए,ऐसा कर उनकी चरण रज को माथे पर लगाने से सुख- सौभाग्य में वृद्धि होती है।
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गौ पूजन का महत्व
धर्मग्रंथ बताते है कि समस्त देवी-देवताओं और पितरों को एक साथ प्रसन्न करना हो तो गौ-भक्ति,गौ-सेवा से बढ़कर कोई अनुष्ठान नहीं है। गाय से प्राप्त सभी घटकों में जैसे दूध, घी, गोबर अथवा गौमूत्र में सभी देवताओं के तत्व संगृहीत रहते हैं। गाय की रक्षा एवं पूजन करने वालों पर सदैव श्रीविष्णु की कृपा बनी रहती है। शिवधर्मोत्तर पुराण के अनुसार जो व्यक्ति गौ-शाला के बीच गायों के खुजलाने के लिए कहीं-कहीं स्तम्भों(खुजाल-खम्भों)की स्थापना करते है वह शिवलोक को प्राप्त करते हैं। तीर्थों में स्नान-दान करने से, ब्राह्मणों को भोजन कराने से, व्रत-उपवास और जप-तप व हवन-यज्ञ करने से जो पुण्य मिलता है वहीं पुण्य गौ को चारा या हरी घास खिलाने अथवा किसी भी रूप में गाय की सेवा करने से प्राप्त हो जाता है।
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 वास्तुदोष दूर करती है गाय
- महाभारत के अनुशासन पर्व में कहा गया है कि गाय जहाँ बैठकर निर्भयतापूर्वक सांस लेती है,वह उस स्थान के सारे पापों को मिटा देती है।

- गाय का पालन करना बहुत लाभकारी माना गया है। जिन घरों में गाय की सेवा होती है,ऐसे घरों में सर्व बाधाओं और विघ्नों का निवारण हो जाता है। विष्णु पुराण के अनुसार जब श्री कृष्ण पूतना के दुग्धपान से डर गए तो नंद दम्पति ने गाय की पूँछ घुमाकर उनकी नज़र उतारी और भय का निवारण किया।

- कूर्म पुराण में कहा गया है कि कभी गाय को लांघकर नहीं जाना चाहिए किसी भी साक्षात्कार,उच्च अधिकारी से भेंट आदि के लिए जाते समय गाय के रंभाने की ध्वनि कान में पड़ना शुभ परिणामों का संकेत है।


- प्रसिद्ध वास्तु ग्रन्थ समरांगण सूत्र के अनुसार, भवन निर्माण का शुभारम्भ करने से पूर्व उस भूमि पर ऐसी गाय को लाकर बांधना चाहिए जो सवत्सा यानि कि बछड़े वाली हो। नवजात बछड़े को गाय जब गाय दुलारकर चाटती है तो उसका फैन भूमि पर गिरकर उसे पवित्र बनाता है और वहां के समस्त दोषों का निवारण स्वतः ही हो जाता है।

 
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