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मृत्यु के बाद आत्मा का सफर ऐसे शुरू होता है

Sat, 09 Nov 2013 05:18 PM IST
टीम डिजिटल
टीम डिजिटल Updated Sat, 09 Nov 2013 05:18 PM IST
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garuda puran village of yamlok

धरती पर आपने कई शहर एवं गांव देखे होंगे। लेकिन धरती

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से अलग भी एक दुनिया हैं जहां इस दुनिया को छोड़ने के बाद मनुष्य को जाना पड़ता है। इस दुनिया में व्यक्ति खुद नहीं जाता बल्कि यम के दो भयानक दूत लेकर जाते हैं। जितने भयानक यम के दूत होते हैं उससे भी भयानक और खतरनाक हैं यहां के गांव।

इन गांवों की संख्या एक नहीं बल्कि पूरे सोलह है और जीवन में पाप कर्म करने वाले मनुष्य को इन सभी गांवों में अलग-अलग प्रकार के कष्टों का सामना करते हुए अंत में यमपुरी पहुंचना होता है। इन भयानक गांवों के बारे में गरुड़ पुराण विस्तार से वर्णन किया गया है।

इन गांवों के नाम हैं सौम्यपुर, सौरिपुर, गन्धर्वपुर, शैलगाम, क्रौंचपुर, विचित्र भवन, बह्वापदपुर, दुःखपुर, नानाक्रन्दपुर, सुतप्तभवन, रौद्रपुर, पयोवर्षणपुर, शीताढयपुर और बहुभीतिपुर।

भगवान विष्णु ने गरुड़ से कहा है कि इन गांवों के मार्ग में न तो विश्राम के लिए वृक्ष की छाया है और न कहीं अन्नादि, जिससे की प्राणों की रक्षा हो सके। मार्ग में प्रलयकाल के समान कई सूर्य चमकते हैं जिससे पिण्ड से बना शरीर तपता रहता है। पीने के लिए जल की एक बूंद भी मार्ग में कहीं उपलब्ध नहीं है।

इस मार्ग में एक असिपत्र नाम का वन है इस वन में कौआ, उल्लू, गीद्घ, मधुमक्खी, मच्छर तथा कई जगह जंगल की आग है। इन सभी से पीड़ा पाते हुए प्रेतआत्मा कभी मल-मूत्र एवं रक्त के कीचड़ में गिरता है तो कभी अंधेरे कुएं में गिरकर छटपटता है।

इस रास्ते में प्राप्त होने वाले कष्ट इतने भयानक हैं जिन्हें पढ़कर मन भयभीत हो सकता है। गरूड़ पुराण में मृतक संस्कार से लेकर मृत्यु के बाद की स्थिति का वर्णन मिलता है।

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