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'धरती छोड़कर चली जाएंगी स्वर्ग से आई गंगा मैया'

Mon, 17 Jun 2013 04:03 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
राकेश/इंटरनेट डेस्क। Updated Mon, 17 Jun 2013 04:03 PM IST
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ganga may disappear in future

राजा भगीरथ के कठिन तपस्या के प्रभाव से गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर पहुंची। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं इसलिए गंगा पतित पाविनी भी कही जाती हैं। लेकिन हो सकता है कि कुछ वर्षों में गंगा पृथ्वी से वापस स्वर्ग चली जाए। भगवान विष्णु ने कहा है कि कलियुग के जब 5000 वर्ष पूरे हो जाएंगे तब गंगा पृथ्वी से वापस स्वर्ग लौट आएगी।

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हम मनुष्य जिस तरह से गंगा को दूषित करते जा रहे हैं उससे इस बात की संभावना प्रबल होती जा रही है कि भगवान विष्णु ने जो कहा है वह सच हो कर रहेगा। क्योंकि जिस नदी को ऋषि मुनियों ने माता के रूप में पूजा आज उसी में मनुष्य कूड़ा कचड़ा बहा रहा है। ऐसे में संभव है कि गंगा मैया नाराज होकर वापस स्वर्ग चली जाएं।
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गंगा के स्वर्ग वापस लौटने के संदर्भ में श्रीमद्देवीभागवत में कथा है कि एक बार गंगा और सरस्वती के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। बीच बचाव के लिए लक्ष्मी आयी तो सरस्वती ने लक्ष्मी को वृक्ष और नदी के रूप में पृथ्वी पर पापियों का पाप स्वीकार करने का श्राप दे दिया। इसके बाद गंगा और सरस्वती ने एक दूसरे को नदी रूप में पृथ्वी लोक पर रहने का श्राप दे दिया।
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श्राप के फलस्वरूप लक्ष्मी पद्मा नदी के रूप में पृथ्वी पर आयी, सरस्वती सरस्वती नदी बन गयीं और गंगा भी नदी रूप में पृथ्वी पर आ गयी। इस घटना के बाद नारद जी ने भगवान विष्णु से पूछा कि तीनों देवियां नदी रूप में पृथ्वी पर कब तक रहेगी। इसके उत्तर में भगवान विष्णु ने नारद से कहा कि जब कलयुग के 5000 वर्ष पूरे हो जाएंगे तब तीनों देवियां वापस अपने अपने स्थान को लौट आएंगी।


कलियुग के 5013 वर्ष पूरे हो चुके हैं और पद्मा एवं सरस्वती नदी का लोप हो चुका है और अब सिर्फ गंगा ही बची है। भगवान विष्णु ने यह भी कहा है कि इन तीन देवियों के साथ वृंदावन और काशी को छोड़कर सभी तीर्थ भी पृथ्वी का त्याग कर देंगे। कलयुग के जब दस हजार वर्ष पूरे हो जाएंगे तब शालिग्राम, शिव, शक्ति और जगन्नाथ जी भी पृथ्वी का त्याग करके अपने लोक लौट जाएंगे। इनके साथ शंख, साधु, श्राद्ध कर्म, धर्म कर्म, देवताओं की पूजा एवं कीर्तन का भी पृथ्वी से लोप हो जाएगा।

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