{"_id":"5e5f598f8ebc3eeb464f26c6","slug":"ekadashi-2020-amalaki-ekadashi-vrat-date-puja-vidhi-and-story","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amalaki Ekadashi 2020: आमलकी एकादशी आज, जानिए इसका महत्व और पूजन विधि","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Amalaki Ekadashi 2020: आमलकी एकादशी आज, जानिए इसका महत्व और पूजन विधि
Fri, 06 Mar 2020 06:58 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 06 Mar 2020 06:58 AM IST
विज्ञापन
रंगभरी एकादशी का व्रत रखने से सभी तरह के पापों का नाश होता है
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आज फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष पर एकादशी का व्रत है। इस एकादशी को आमलकी एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू मान्यताओं में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। माह के दोनों पक्षों में एक-एक एकादशी आती हैं।
विज्ञापन
मान्यता के अनुसार रंगभरी एकादशी का व्रत रखने से सभी तरह के पापों का नाश होता है और पुण्य फल मिलता है। हिंदू शास्त्रों में रंगभरी एकादशी के दिन पर स्नान, दान और व्रत करने से हजारों गोदान के बराबर फल की प्राप्ति बताई गई है।
विज्ञापन
इस दिन बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाता है और इसी दिन काशी में होली पर्व का आरम्भ माना जाता है।
मान्यता के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव माता पार्वती के संग विवाह करने के बाद पहली बार काशी नगरी आए थे। तब खुशी के चलते शिव जी के गण रंग अबीर खेलते हैं। इस दिन से ही बनारस में रंग खेलने की शुरुआत हो जाती है। रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ को दूल्हे की तरह सजाया जाता है।
विज्ञापन
आंवला पूजन का महत्व
इस एकादशी का महत्व अक्षय नवमी के समान होता है। आमलकी का मतलब होता है आंवला। जिस प्रकार अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ की पूजा होती है उसी प्रकार से आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे भगवान विष्णु की पूजा करने से पुण्य होता है।
शास्त्रों में आमलकी एकादशी के महत्व को बताया गया है। मान्यता के अनुसार सृष्टि के आरंभ में आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी। कथा के अनुसार विष्णु जी की नाभि से उत्पन्न होने के बाद ब्रह्रा जी के मन में सवाल आया कि मेरी उत्पत्ति कैसे हुई। इस प्रश्न के जवाब में ब्रह्राजी तपस्या करने लगे। तब भगवान विष्णु प्रगट हुए और उन्हें सामने देखकर ब्रह्राजी रोने लगे। ब्रह्राजी के आंसू भगवान विष्णु के पैरों पर गिरने लगे।
ब्रह्राजी की ऐसी भावना देखकर विष्णुजी प्रसन्न हो गए। तब ब्रह्राजी के आंसूओं से आमलकी यानी आंवले के वृक्ष की उत्पति हुई। इस प्रकार से आमलकी एकादशी के दिन जो भी भक्त आंवले के पेड़ की पूजा करेगा उसके सारे पाप नष्ट हो जाएंगे।
इस एकादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। साथ ही आंवले का फल भगवान विष्णु को अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर उनका ध्यान करें। शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन आंवला खाना शुभ होता है।