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Dwarka Temple: जानिए किस वजह से इतिहास में पहली बार होली पर बंद रहेंगे द्वारका मंदिर के कपाट

Tue, 09 Mar 2021 03:37 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Tue, 09 Mar 2021 03:37 PM IST
सार

  • 27 मार्च से 29 मार्च तक बंद रहेंगे द्वारका मंदिर के कपाट
  • कोरोना संक्रमण के चलते लिया गया है फैसला
  • सोशल मीडिया के जरिए आरती के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु

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dwarka temple to remain closed for devotees due to coronavirus on holi
द्वारकाधीश मंदिर - फोटो : Facebook/Beauty Of India

विस्तार

अगर आप इस बार होली में द्वारकाधीश के दर्शन करने के बारे में सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है। इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब होली में द्वारका मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। दरअसल कोरोना संक्रमण की चुनौती को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने यह फैसला लिया है। हालांकि सेवकों के द्वारा परंपरागत रूप से मंदिर में पूजा अर्चना होगी। 

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27 मार्च से 29 मार्च तक बंद रहेंगे कपाट
मंदिर प्रशासन के फैसले के तहत द्वारका मंदिर के कपाट 27 मार्च से 29 मार्च तक बंद रहेंगे। वहीं वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धालु आरती के दर्शन कर सकेंगे। आपको बता दें कि 29 मार्च को होली है और होली के शुभ अवसर पर द्वारकाधीश के दर्शन करने के लिए लाखों श्रद्धालु द्वारिक मंदिर आते हैं। 
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चार धामों में से एक हैं द्वारका
द्वारकाधीश मंदिर गुजरात के जामनगर ज़िले में गोमती नदी के तट पर द्वारका शहर में स्थित है। यह मंदिर द्वारका का मुख्य मंदिर है जिसे जगत मंदिर (ब्रह्मांड मंदिर) या रणछोड़राय मंदिर भी कहते हैं। यही गोमती द्वारका भी कहलाती है। भगवान विष्णु या उनके अवतार भगवान कृष्ण को समर्पित द्वारकाधीश मंदिर चार धामों (रामेश्वरम,बद्रीनाथ,द्वारका और जगन्नाथ पुरी) में से एक है। 
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ये हैं मंदिर की विशेताएं
द्वारकाधीश का मुख्य मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना माना गया है ऐसा भी उल्लेख है कि महाभारत युद्ध के बाद जब द्वारका जहाँ पर भगवान कृष्ण का राज्य था, सागर में जलमग्न हो गई थी। लेकिन बाद में इस मंदिर का निर्माण भगवान कृष्ण के पड़पोते वज्रनाभ ने किया था। हिन्दू दृष्टा और धर्मगुरु शंकराचार्य ने भी इसके विस्तार और निर्माण में व्यापक योगदान दिया। 


16वीं शताब्दी में हुआ था मंदिर का नवीनीकरण
इतिहास के पन्ने पलटने से पता लगा कि जगत मंदिर के आस-पास की संरचनाओं का निर्माण 16वीं शताब्दी और इसका नवीनीकरण 19वीं शताब्दी में हुआ था। श्री कृष्ण का यह मंदिर 108 पवित्र विष्णु मंदिरों या दिव्यसेवसम में से एक है। दिव्यसेवसम पवित्र मंदिर विष्णु या कृष्ण को समर्पित मंदिर हैं,जिन्हें तमिल कवि संतों ने अपने गीतों में आलवार कहा था

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