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क्या है शाकुंभरी देवी मंदिर की मान्यता, जहां से मुख्यमंत्री योगी ने शुरू किया चुनावी शंखनाद

Sun, 24 Mar 2019 12:04 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 24 Mar 2019 12:04 PM IST
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CM Yogi will visit maa shakumbhari devi know importance of shakumbhari devi temple
शाकुंभरी देवी मंदिर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को मां शाकुंभरी देवी मंदिर में पूजन करने के बाद चुनावी शंखनाद कर चुनाव प्रचार का अभियान शुरू करेंगे। आइए जानते हैं मां शाकुंभरी देवी मंदिर की मान्यता और पौराणिक महत्व

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शाकुंभरी देवी मंदिर की मान्यताएं
यह मंदिर दुर्गा शक्तिपीठ है। मान्यता के अनुसार यहां सती का शीश यानि सिर गिरा था। शाकुंभरी देवी की उपासना करने वालो के घर भोजन से भरे रहते हैं। शाकुंभरी देवी की कथा के अनुसार एक दैत्य जिसका नाम दुर्गम था उसने ब्रहमा जी को प्रसन्न कर उनसे वरदान में चारो वेदो को प्राप्त कर लिया था। साथ ही यह वरदान प्राप्त कर लिया था कि उससे युद्ध में कोई जीत ना सके। 
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दुर्गम राक्षस के आतंक से करीब सौ वर्ष तक वर्षा न होने के कारण अन्न-जल के अभाव में भयंकर सूखा पड़ा, जिससे लोग मर रहे थे। सभी देवता देवी की शरण में गये और उन्होंने उनसे दुर्गम राक्षस को मारने की प्रार्थना की।  देवताओं को इस तरह दुखी देखकर मां दुर्गा मां शाकंभरी देवी के रूप में अवतरित हुई। जिनके सौ नेत्र थे। उन्होंने रोना शुरू कर दिया जिससे हजारो धाराऐं बहने लगी अंत में मां शाकंभरी दुर्गम दैत्य का अंत कर दिया।
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एक अन्य कथा के अनुसार शाकुम्भरा (शाकंभरी) देवी ने 100 वर्षों तक तप किया था और महीने के अंत में एक बार शाकाहारी भोजन कर तप किया था। ऐसी निर्जीव जगह जहां पर 100 वर्ष तक पानी भी नहीं था, वहां पर पेड़-पौधे उत्पन्न हो गए। 

श्री दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय में मां शाकुंभरी देवी का वर्णन मिलता है। सौ नेत्रो से प्रजा की ओर दयापूर्ण दृष्टि से देखने के कारण देवी का नाम शताक्षी प्रसिद्ध हुआ। इसी प्रकार जब सारे संसार मे वर्षा नहीं हुई और अकाल पड गया तो उस समय शताक्षी देवी ने अपने शरीर से उत्पन्न शाको यानि साग सब्जी से संसार का पालन किया । इस कारण पृथ्वी पर शाकंभरी नाम से प्रसिद्ध हुई।


माता के दर्शन करने से पहले बाबा भूरादेव के होते हैं दर्शन
मां भगवती का परम भक्त भूरादेव दैत्यों को हराने के लिए उनसे युद्ध करने मैदान में उतरा था। युद्ध में भक्त भूरादेव के साहस को देखकर मां भगवती ने भूरादेव को वचन दिया था कि जो भक्त मेरे दर्शन से पूर्व भूरादेव के दर्शन नहीं करेगा उसकी यात्रा पूर्ण नहीं होगी। यही कारण है कि आज भी भारी संख्या में पहले श्रद्धालु भूरादेव मंदिर पर प्रसाद चढ़ाने के बाद ही मां शाकुंभरी देवी के दर्शन करते हैं।

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