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Chaitra Navratri 2023 : काम, क्रोध और लोभ से मुक्ति दिलाती है नवरात्रि

Sun, 19 Mar 2023 01:58 PM IST
विनोद शुक्ला कृष्णा कांत मिश्रा ,अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक हीलर
कृष्णा कांत मिश्रा ,अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक हीलर Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 19 Mar 2023 01:58 PM IST
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Chaitra Navratri 2023 Importance And Significance Effective Remedies
Chaitra Navratri 2023: हमारे आध्यात्मिक त्योहारों में रात्रि सिर्फ दो जगह आती है। महाशिवरात्रि( पुरुष तत्व) और नवरात्रि (महिला तत्व)। - फोटो : अमर उजाला

आजकल हमारे आध्यात्मिक त्योहारों के प्रति युवाओं की रुचि कम होती जा रही है क्योंकि सही ढंग से तर्क सहित नहीं समझना भी एक कारण हो सकता है। आइए जानते है हिंदू नववर्ष की शुरुआत गुड़ी पड़वा से नवरात्रि की शुरुआत होती है।

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नवरात्रि क्या है ?
हमारे आध्यात्मिक त्योहारों में रात्रि सिर्फ दो जगह आती है। महाशिवरात्रि( पुरुष तत्व) और नवरात्रि (महिला तत्व)। शिव शक्ति के बगैर ब्रह्मांड की कल्पना नहीं की जा सकती उसी प्रकार से पुरुष महिला के बगैर परिवार की कल्पना नहीं की जा सकती है।
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नवरात्रि वर्ष में चार बार क्यों आती है ?
नवरात्रि उन प्रथम नव रातों को कहा जाता है जब दो मौसम के मिलने के बीच की होती है। जिस तरह से चार मौसम होते हैं उसी प्रकार चार बार नवरात्रि पर्व आता है। प्रथम तीन दिन शरीर के तमस तत्व यानी क्रोध अहंकार से मुक्ति दिलवाते है। अगले तीन दिन रजस के आपने जो राजसी भोग जीवन जिया है उसकी अधिकता को दूरकर आरोग्यता की ओर ले जाते है। अंतिम तीन दिन माता से मिला है उसकी कृतज्ञता देने के लिए आते हैं जिसमें शरीर पूर्ण रूप से सत्व में होता है। अगर साधना जप, तप और योग के साथ की गई हो चार नवरात्रि में से दो नवरात्रि चैत्र गृहस्थ वालों के लिए और दो गुप्त, सुप्त ऋषि मुनियों के लिए होती है।

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Chaitra Navratri 2023 Importance And Significance Effective Remedies
Chaitra Navratri - फोटो : istock
नवरात्रि पर क्यों रखते हैं उपवास ?
 मौसम के बदलाव से शरीर को नए मौसम में ढ़लने में कभी-कभी बीमारी भी घेर लेती है। इससे बचने के किया शरीर को पूर्ण रूप से शुद्ध और आंतरिक क्षमता को बढ़ाने के लिए व्रत उपवास और अल्प आहार किया जाता है।

नवरात्रि में नव का महत्व
हमारे आध्यात्मिक त्योहारों में नव रात्रि मातृ शक्तियां को दर्शाती है। जिस प्रकार नव ग्रह, नव त्योहार , नव रंग और गर्भ के 9 माह 9 दिन। जिस प्रकार मां के गर्भ में 9 माह शिशु का विकास होता है उसी क्रम में नवरात्रि में हर अंग का शुद्धिकरण होता है ।

नवरात्रि से शुद्धिकरण के प्रकार
दो प्रकार की विद्या होती है। परा विद्या और अपरा विद्या। एक परा विद्या में जप तप मंत्र पाठ हवन से शुद्धिकरण होता है। जिसे हम भक्ति योग कहते है तो गलत नहीं होगा। अपरा विद्या जिसमें प्राणायाम ध्यान के माध्यम से शुद्धिकरण होता है। शरीर के हर चक्र में माता का रूप होता है।
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Chaitra Navratri 2023 Importance And Significance Effective Remedies
Chaitra Navratri - फोटो : istock
माता का नवरात्रि में पूजन का महत्व
साधक नौ दिन व्रत रखता है। नीचे सोता है सभी सुख सुविधा से अपने आपको अलग रखता है। माताजी की घट स्थापना करता है। कुछ कुंडों में गेहूं डालकर और मिट्टी डाल घर की खुशहाली के नौ दिन पूजा के वक्त सम्मुख बैठ सप्तशती का पाठ देवी और देवी कवच इत्यादि पाठ पढ़ा जाता है। माता के मंत्रों का जापकर बाहरी दुनिया से अपने आप को विरक्त करता है। देवी कवच और कुछ नहीं शरीर के सभी अंगों को याद कर उनके प्रति कृतज्ञता देना इसलिए हर अंग के लिए एक माता जी का नाम आता है। देवी कवच पढ़ते पढ़ते शरीर के सभी अंगों पर ध्यान ले जाना अपरा विद्या में आता है।

अंतिम दिन हवन का महत्व
जैसा कि आपको मालूम है जब हवन याने घर के सभी लोग अग्नि को बाहरी आंतरिक नकारात्मकता ग्रहों की आपदा की बीमारी की दूर करने संकल्प के साथ अपनी अपनी आहुति देते हैं। सभी परिवार के लोग के बीच एक साथ आत्मीयता बढ़ती है और नकारात्मकता दूर होती है।

माता जी की आरती
नौ दिन तक माता दुर्गाजी की आरती पूजन के साथ गाई जाती है। वर्तमान की नजर से देखें तो आरती में तुमको निश दिन ध्यावत अर्थात आपको में हर दिन याद करता हूं । शुभ निशुंभ सहारे। मधु कैटभ दो मारे यह दैत्य हमारे शरीर के राग द्वेष क्रोध अहंकार है। जो जीवन में चाहते है जो नहीं चाहते इसको आरती में गाकर शरीर को याद दिलाते है। किसको जीवन में अपनाना है और किसको त्यागना है। आरती के अंत में एक प्रार्थना है जिसमें धर्म पंथ जगत कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
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Chaitra Navratri 2023 Importance And Significance Effective Remedies
Chaitra Navratri 2022: - फोटो : istock
प्रसाद बांटने का महत्व
आरती के अंत में भगवान को चढ़ाया प्रसाद बांटा जाता है। जिसको हर इंसान भाव से स्वीकार करता है। प्रसाद अधिक से अधिक लोगों को पहुंचे यह आपमें कुछ देने के भाव सिखाता है। इसीलिए बच्चों से प्रसाद बटवाते हैं.  अंजान व्यक्ति भी बड़े भाव से स्वीकार करता है।

आज के युवा नवरात्रि को कैसे करें
नवरात्रि का हर दिन हमारे रीढ़ की हड्डी से जुड़े चक्रों से संबंध रखता है जिसे हम अलग अलग माताओं के नाम से जानते हैं। हमारे चक्र ही हमारे स्वभाव के कारण है जिसे बखूबी पुरानी कहावतों में दर्शाया गया है। आइए आज आने वाली नवरात्रि  की साधना को अपने शरीर से जोड़ते है।
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Chaitra Navratri 2023 Importance And Significance Effective Remedies
चैत्र नवरात्रि 2023
पहला दिन
रात को सोते वक्त अपने अतीत को याद कर वर्ष तक के समय की कोई गलती आपसे मंशागत या ना मंशागत हुई हो उसको मूलाधार चक्र पर ध्यान के साथ समर्पित करें। यह आपके आलसी स्वभाव को दूरकर जीवन उत्साह से भर देगी। क्योंकि एक आलसी व्यक्ति कभी उत्साही नहीं हो सकता।

द्वितीय दिन
सुबह उठकर अपना ध्यान स्वाधिष्ठान चक्र ( अपनी जनेंद्रीय के पीछे रीढ़ की हड्डी की और अगर कामुक विचार आते है तो इस स्थान पर ध्यान रख श्वास लें। आपके कामुक विचारों से मुक्ति मिलेगी जो क्रियाशील स्वभाव में बदलेगी।

तृतीय दिन
अपना ध्यान नाभि पर रखें अगर आपका स्वभाव ना चाह कर भी ईर्ष्या से ग्रस्त होता है । अपना ध्यान नाभि पर रख कर श्वास छोड़े । कहावत है कि वो कमा रहा है तेरा पेट क्यों दुखता है अर्थात ईर्ष्या का संबंध नाभि से है। ईर्ष्या का स्वभाव दूरकर अपनत्व और उदारता बढ़ेगी।
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Chaitra Navratri 2023 Importance And Significance Effective Remedies
Navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला।
चौथा दिन
अपना ध्यान छाती की मध्य बिंदु यानी ह्रदय चक्र पर रखें। जिसे भी भय रहता है। अज्ञात भय रहता है। छाती पर ध्यान रखकर श्वास लें और छोड़े। डर का स्वभाव खत्म होगा आप देखेंगे जब भी हमें डर लगता है अचानक हमारा हाथ ह्रदय चक्र पर जाता है मतलब भय का स्थान नाभि है और प्यार सकारात्मक ऊर्जा के रूप में ह्रदय चक्र से निकलता है इसीलिए आप जब कहते हैं तुझे दिल से प्यार करता हुं आपका हाथ अपने आप छाती पर ह्रदय चक्र पर जाता है।

पांचवां दिन
अपना ध्यान अपने कंठ पर लेकर जाएं श्वास ले और कंठ पर ध्यान रखते छोड़े। जरा जरा सी बात पर रोना नहीं आएगा। साथ ही कंठ पर ध्यान रखते हुए जिन्होंने आपकी कभी भी मदद की हो किसी भी रूप में उनको कृतज्ञता दे। कृतज्ञता का स्थान भी कंठ चक्र होता है।

6,7,8  दिन
अपना ध्यान अपने आज्ञा चक्र यानी दोनों भौं के बीच का स्थान पर श्वास लेकर छोड़े और याद करे उन पलों को जब आप मंशागत ना मंशागत क्रोध अहंकार में आ गए थे। आप नोट करना जब आप गुस्से में होते हैं तो दोनों आईब्रो सिकुड़ जाती है जो यह बताती है क्रोध अहंकार का स्थान आज्ञा चक्र है। वहीं कुछ याद करना हो तो आपकी एक उंगली अपने आप आज्ञा चक्र पर चली जाती है। इसका मतलब सजगता भी आज्ञा चक्र पर है।

नौवें दिन
अपना ध्यान सिर की चोटी पर सहस्त्रधार चक्र पर श्वेत रंग की कल्पना कर शांति से बैठे नवरात्रि की रात में किया गया चक्र ध्यान  आपको आलस्य काम ईर्ष्या, भय और क्रोध से मुक्त करेगा। शरीर के शुद्धिकरण के लिए नवरात्रि आती है जो आपको निरोगी रखती है मौसम बदलने के वातावरण से नव रात्रि में अपने शरीर से जुड़ अपने स्वभाव रूपी विकार दूर करें। जिसके कारण आप लोगों समाज से दूर हो जाते हैं।
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