Chaitra Navratri 2023: चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से वासंतिक या चैत्र नवरात्रि आरंभ हो जाती है। नवरात्रि स्थापना से लेकर रामनवमी तक का समय अत्यंत पवित्रता, उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है। आदिशक्ति की उपासना के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव से की जाती है। देवी मां प्रसन्न होकर अपने भक्तों को शक्ति, स्फूर्ति और विनम्रता प्रदान करती हैं। सभी को अपना ममतामयी आशीर्वाद देती हैं। नवरात्रि पूजा के इन पावन दिनों में यदि श्रद्धा भक्ति के साथ-साथ कुछ वास्तु नियमों को ध्यान में रखकर मां दुर्गा की उपासना की जाए तो इससे पूजा में ध्यान भी लगता है और पूजा के फल में वृद्धि होती है।
{"_id":"641164fde1c39be70a074c19","slug":"chaitra-navratri-2023-things-to-do-for-lord-durga-blessings-know-maa-durga-ashirwad-ke-upay-2023-03-15","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Chaitra Navratri 2023 : 22 मार्च से चैत्र नवरात्रि आरंभ, जानिए कैसे करें मां दुर्गा की आराधना","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Chaitra Navratri 2023 : 22 मार्च से चैत्र नवरात्रि आरंभ, जानिए कैसे करें मां दुर्गा की आराधना
Thu, 16 Mar 2023 07:25 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 16 Mar 2023 07:25 AM IST
विज्ञापन
Navratri 2023:
- फोटो : iStock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Chaitra Navratri
- फोटो : अमर उजाला
सही दिशा में हो पूजन
मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा का दिशा क्षेत्र उत्तर-पूर्व पूजा करने के लिए आदर्श स्थान हैं। यहां पूजा करने से अच्छा प्रभाव मिलता हैं, शुभ फलों में वृद्धि होती है एवं आपको हमेशा ईश्वर का मार्गदर्शन मिलता रहता है।
सात्विक रंगों का प्रयोग
ध्यान रहे कि जिस कमरे में आप माता का पूजन कर रहे हैं वह कक्ष साफ़-सुथरा हो, उसकी दीवारें हल्के पीले, गुलाबी ,हरे या बैंगनी जैसे सात्विक रंग की हो तो अच्छा है, क्योंकि ये रंग आध्यात्मिक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते है। काले, नीले और भूरे जैसे तामसिक रंगों का प्रयोग पूजा कक्ष की दीवारों पर नहीं होना चाहिए क्योंकि ये रंग सुस्ती एवं आलस्य को बढ़ाते हैं।
मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा का दिशा क्षेत्र उत्तर-पूर्व पूजा करने के लिए आदर्श स्थान हैं। यहां पूजा करने से अच्छा प्रभाव मिलता हैं, शुभ फलों में वृद्धि होती है एवं आपको हमेशा ईश्वर का मार्गदर्शन मिलता रहता है।
सात्विक रंगों का प्रयोग
ध्यान रहे कि जिस कमरे में आप माता का पूजन कर रहे हैं वह कक्ष साफ़-सुथरा हो, उसकी दीवारें हल्के पीले, गुलाबी ,हरे या बैंगनी जैसे सात्विक रंग की हो तो अच्छा है, क्योंकि ये रंग आध्यात्मिक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते है। काले, नीले और भूरे जैसे तामसिक रंगों का प्रयोग पूजा कक्ष की दीवारों पर नहीं होना चाहिए क्योंकि ये रंग सुस्ती एवं आलस्य को बढ़ाते हैं।
नवरात्रि 2023 शुभकामना
- फोटो : amar ujala
इस दिशा में रखें कलश
धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी ग्रह,नक्षत्रों एवं तीर्थों का वास होता है। इनके अलावा ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र,सभी नदियों, सागरों, सरोवरों एवं तैतीस कोटि देवी-देवता कलश में विराजमान होते हैं। वास्तु के अनुसार ईशान कोण(उत्तर-पूर्व)जल एवं ईश्वर का स्थान माना गया है और यहां सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा रहती है। इसलिए पूजा करते समय माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना इसी दिशा में करनी चाहिए।
शुभ रहेगी यह दिशा
देवी मां का क्षेत्र दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिशा माना गया है इसलिए यह ध्यान रहे कि पूजा करते समय आराधक का मुख दक्षिण या पूर्व में ही रहे। शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाने वाली पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है एवं दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से आराधक को शांति अनुभव होती है।
धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी ग्रह,नक्षत्रों एवं तीर्थों का वास होता है। इनके अलावा ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र,सभी नदियों, सागरों, सरोवरों एवं तैतीस कोटि देवी-देवता कलश में विराजमान होते हैं। वास्तु के अनुसार ईशान कोण(उत्तर-पूर्व)जल एवं ईश्वर का स्थान माना गया है और यहां सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा रहती है। इसलिए पूजा करते समय माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना इसी दिशा में करनी चाहिए।
शुभ रहेगी यह दिशा
देवी मां का क्षेत्र दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिशा माना गया है इसलिए यह ध्यान रहे कि पूजा करते समय आराधक का मुख दक्षिण या पूर्व में ही रहे। शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाने वाली पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है एवं दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से आराधक को शांति अनुभव होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नवरात्रि 2023 शुभकामना
- फोटो : amar ujala
प्रवेशद्वार पर बंदनवार
देवी मां की पूजा-अनुष्ठान के दौरान घर के प्रवेशद्वार पर आम या अशोक के ताजे हरे पत्तों की बंदनवार लगाईं जाती है। ऐसा करने के पीछे मान्यता यह है कि इससे घर में नकारात्मक या बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। माना जाता है कि देवी मां की पूजा के दौरान देवी के साथ तामसिक शक्तियां भी घर में प्रवेश करती हैं, लेकिन मुख्यद्वार पर बंदनवार लगी होने के कारण तामसिक शक्तियां घर के बाहर ही रहती हैं।
Chaitra Navratri 2023: चैत्र नवरात्रि पर अपनी राशि अनुसार करें मां दुर्गा की आराधना, मिलेगी सुख-समृद्धि
Chaitra Navratri 2023 Vrat Niyam: चैत्र नवरात्रि व्रत के समय इन नियमों का करें पालन, मां दुर्गा देंगी आशीर्वाद
Ram Navami 2023: इस बार की रामनवमी होगी खास, बनेंगे 5 अति दुर्लभ संयोग
देवी मां की पूजा-अनुष्ठान के दौरान घर के प्रवेशद्वार पर आम या अशोक के ताजे हरे पत्तों की बंदनवार लगाईं जाती है। ऐसा करने के पीछे मान्यता यह है कि इससे घर में नकारात्मक या बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। माना जाता है कि देवी मां की पूजा के दौरान देवी के साथ तामसिक शक्तियां भी घर में प्रवेश करती हैं, लेकिन मुख्यद्वार पर बंदनवार लगी होने के कारण तामसिक शक्तियां घर के बाहर ही रहती हैं।
Chaitra Navratri 2023: चैत्र नवरात्रि पर अपनी राशि अनुसार करें मां दुर्गा की आराधना, मिलेगी सुख-समृद्धि
Chaitra Navratri 2023 Vrat Niyam: चैत्र नवरात्रि व्रत के समय इन नियमों का करें पालन, मां दुर्गा देंगी आशीर्वाद
Ram Navami 2023: इस बार की रामनवमी होगी खास, बनेंगे 5 अति दुर्लभ संयोग
विज्ञापन
नवरात्रि 2023 शुभकामना
- फोटो : amar ujala
आग्नेय कोण में हो दीपक
नवरात्रि के समय देवी मां की पूजा में शुद्ध देसी घी का अखंड दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है,नकारात्मक ऊर्जाएं नष्ट होती हैं एवं इससे आस-पास का वातावरण शुद्ध और सुकून भरा हो जाता है। दीपक को पूजा स्थल के आग्नेय यानि दक्षिण-पूर्व में रखना शुभ होता है क्योंकि यह दिशा अग्नितत्व की दिशा मानी गई है। वास्तु के अनुसार आग्नेय कोण में अखंड ज्योति या दीपक रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का निवास होता है। संध्याकाल में पूजन स्थल पर घी का दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। घर के सदस्यों को प्रसिद्धि मिलती है और रोग एवं क्लेश दूर होते हैं।
मां को प्रिय हैं लाल रंग
मां दुर्गा को लाल रंग अत्याधिक प्रिय है। लाल रंग को वास्तु में भी शक्ति एवं शौर्य का प्रतीक माना गया है इसलिए देवी को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, श्रृंगार की वस्तुएं एवं पुष्प यथासंभव लाल रंग के ही होने चाहिए। मां के पूजन में प्रयोग की जाने वाली सामग्री पूजन स्थल के आग्नेय कोण में रखने से शुभफलों में वृद्धि होगी।पूजा कक्ष के दरवाज़े पर हल्दी,सिन्दूर या रोली से दोनों तरफ स्वास्तिक बना देने से मां की कृपा प्राप्त होती है, वास्तुदोषों से उत्पंन बुरे प्रभाव दूर होते हैं।
नवरात्रि के समय देवी मां की पूजा में शुद्ध देसी घी का अखंड दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है,नकारात्मक ऊर्जाएं नष्ट होती हैं एवं इससे आस-पास का वातावरण शुद्ध और सुकून भरा हो जाता है। दीपक को पूजा स्थल के आग्नेय यानि दक्षिण-पूर्व में रखना शुभ होता है क्योंकि यह दिशा अग्नितत्व की दिशा मानी गई है। वास्तु के अनुसार आग्नेय कोण में अखंड ज्योति या दीपक रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का निवास होता है। संध्याकाल में पूजन स्थल पर घी का दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। घर के सदस्यों को प्रसिद्धि मिलती है और रोग एवं क्लेश दूर होते हैं।
मां को प्रिय हैं लाल रंग
मां दुर्गा को लाल रंग अत्याधिक प्रिय है। लाल रंग को वास्तु में भी शक्ति एवं शौर्य का प्रतीक माना गया है इसलिए देवी को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, श्रृंगार की वस्तुएं एवं पुष्प यथासंभव लाल रंग के ही होने चाहिए। मां के पूजन में प्रयोग की जाने वाली सामग्री पूजन स्थल के आग्नेय कोण में रखने से शुभफलों में वृद्धि होगी।पूजा कक्ष के दरवाज़े पर हल्दी,सिन्दूर या रोली से दोनों तरफ स्वास्तिक बना देने से मां की कृपा प्राप्त होती है, वास्तुदोषों से उत्पंन बुरे प्रभाव दूर होते हैं।