Astro Tips: जन्मकुंडली से जानिए अपने विवाह का योग, कैसा मिलेगा आपका जीवनसाथी और दांपत्य सुख
किसी जातक का वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा इसके बारे में कुंडली का सप्तम भाव, सप्तमेश यानी सप्तम भाव का स्वामी, नवांश की स्थिति, शुक्र और गुरु ग्रह के बारे में विचार किया जाता है।
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वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कोई व्यक्ति इस पृथ्वी पर जन्म लेता है तो उसी समय आकाशमंडल में मौजूद ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति जैसे रहती है वही उसकी लग्न कुंडली बनती है। व्यक्ति की जन्म कुंडली उसके पूरे जीवनकाल की यात्रा का विवरण होता है। इसी जन्मकुंडली का विश्लेषण करके जातक के जीवन में आने वाले सुखों और कष्टों की विश्लेषण किया जाता है। व्यक्ति की कुंडली का गहन अध्ययन करके उसकी आर्थिक स्थिति, भाग्य, करियर, कारोबार, सेहत और वैवाहिक जीवन के बारे में जानकारी मिलती है। आज हम आपको कुंडली में जातक के विवाह के संबंध में कुछ जानकारी देने जा रहे हैं। किसी जातक का वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा इसके बारे में कुंडली का सप्तम भाव, सप्तमेश यानी सप्तम भाव का स्वामी, नवांश की स्थिति, शुक्र और गुरु ग्रह के बारे में विचार किया जाता है। इन्ही के आधार पर वैवाहिक जीवन में सुख है या नहीं इसके बारे में पता लगाया जाता है। आइए जानते हैं किन-किन स्थितियों में वैवाहिक जीवन के बारे में भाविष्यवाणी की जाती है।
- अगर किसी जातक की कुंडली के सातवें भाव में वृषभ राशि हो यानी इस भाव के स्वामी शुक्रदेव हुए और शुक्र व चंद्रमा सम राशियों में हो तो व्यक्ति का विवाह बहुत ही सुंदर जीवन साथी के साथ होता है। ऐसे व्यक्ति का जीवनसाथी बहुत ही प्यार करने वाला होता है।
- जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली कुंभ लग्न की हो और सूर्य पर शुभ ग्रहों की द्दष्टि पड़े तो व्यक्ति का विवाह एक संपन्न और अमीर परिवार में होता है। ऐसे व्यक्ति का जीवनसाथी बहुत ही धनी और संपन्न होता है।
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में जहां लग्न कुंडली से सामान्य भविष्यवाणी की जाती है तो वहीं नवमांश कुंडली से सूक्ष्म भविष्यवाणी की जाती है। जब कोई ग्रह लग्न कुंडली और नवमांश कुंडली में कोई ग्रह एक ही राशि में बैठा हो तो उसे वर्गोत्तम माना जाता है। जब ग्रह वर्गोत्तम होता है यह बहुत शुभ फल प्रदान करता है। शुक्र और गुरु के वर्गोत्तम होने पर व्यक्ति का वैवाहिक जीवन अच्छा रहता है।
- वहीं जब किसी जातिका की नवांश कुंडली के आठवें भाव में भाव ग्रह हो या फिर यह अष्टम भाव पाप ग्रहों से द्दष्ट हो तो व्यक्ति का वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं माना जाता है। इस स्थिति में दांपत्य जीवन में मधुरता नहीं रहती। साथी छोटी-छोटी बातों पर बहसबाजी और लड़ाई करते हैं। कई बार कुछ स्थितियों में दोनों के रिश्ते बहुत खराब हो जाते हैं और बात तलाक तक पहुंच जाता है।
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- अगर किसी की कुंडली के सप्तम भाव के स्वामी पर शुभ ग्रहों की द्दष्टि हो, शुक्र अपनी उच्च राशि में हो या फिर स्वराशि में तो व्यक्ति का विवाह जल्दी होता है और अच्छा जीवनसाथी मिलता है।
- जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली के सप्तम भाव में राहु ग्रह मौजूद हो तो ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन बहुत ही परेशानियों से भरा होता है। ऐसे जातक या जातिका विवाह देर से होता है।
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- राहु के अलावा जब कुंडली के सप्तम भाव में शनिदेव होते हैं तो व्यक्ति का विवाह देर होता है। कुंडली के सप्तम भाव में शनि होने पर व्यक्ति का दांपत्य जीवन उतार-चढ़ाव से भरा होता है।
- जब किसी जातक की जन्मकुंडली के सातवें भाव में कोई ग्रह स्वराशि या उच्च राशि पर मंगल का प्रभाव होता है तो व्यक्ति का जीवनसाथी बहुत क्रोधी स्वभाव, लड़ाकू और जिद्दी होता है।
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