Ahoi Ashtami 2020: अहोई अष्टमी के दिन भूलकर भी न करें ये काम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस बार अहोई माता का व्रत 8 नवंबर को किया जाएगा। यह व्रत माताओं द्वारा अपनी संतान की प्राप्ति और दीर्घायु के लिए किया जाता है। करवाचौथ की तरह इस व्रत को भी निर्जला रखा जाता है। तारों की छांव में अहोई माता की पूजा करके, कथा पढ़ने के पश्चात व्रत का पारण किया जाता है। अहोई अष्टमी का व्रत करने वाली माताओं को इस दिन कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक होता है। स्वास्थय खराब होने या फिर किसी विशेष परिस्थिति में माताएं नियमों का पूरी तरह से पालन करना बाध्य नहीं है। लेकिन सामान्यतः अहोई व्रत में नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए। जानते हैं अहोई अष्टमी के नियम
- अहोई अष्टमी का व्रत रहने से एक दिन पहले ही तामसिक भोजन का त्याग कर देना चाहिए। लहसुन प्याज भी तामसिक की श्रेणी में आते हैं इसलिए अहोई अष्टमी के दिन और एक दिन पहले लहसुन प्याज का प्रयोग न करें।
- अहोई अष्टमी का व्रत करने के लिए मन, वचन और कर्म से भी शुद्ध होना बहुत आवश्यक माना जाता है। इसलिए तन की शुद्धता के साथ मन की शुद्धता का ध्यान भी रखें। पूरे घर की साफ-सफाई करें। किसी के लिए अपने मन में बुरे विचार न लाएं।
- सनातन धर्म में व्रत करने वाले को दिन के समय सोना वर्जित माना गया है। इसलिए अहोई अष्टमी का व्रत करने वाली माताओं को दोपहर के समय नहीं सोना से चाहिए। ऐसी मान्यता है कि अहोई व्रत में दिन के समय सोने से संतान को कष्ट हो सकता है।
- अहोई अष्टमी की पूजा में करवे का प्रयोग भी किया जाता है कुछ माताएं पुराने करवे या करवा चौथ के करवे का प्रयोग भी कर लेती हैं लेकिन ऐसा कतई नहीं करना चाहिए। अहोई की पूजा करने के लिए नए करवे का ही उपयोग करें।
- अहोई अष्टमी के दिन काले रंग और नीले रंग के वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना उत्तम रहता है।
- अहोई अष्टमी के दिन कांसे के बर्तनों का प्रयोग भी वर्जित माना गया है। इसलिए अहोई अष्टमी के दिन पूजा या अन्य कार्यों के लिए कांसे के बर्तन का प्रयोग न करें।