Benefits of tilak : जानिए क्यों लगाते हैं माथे पर तिलक और सौभाग्य से क्या है इसका संबंध?
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सनातन परंपरा में किसी भी पूजा या शुभ कार्य में तिलक लगाने की परंपरा है। मंदिर में ईश्वर दर्शन के बाद तो माथे पर तिलक को ईश्वर का प्रसाद समझकर अवश्य लगाया जाता है। माथे पर लगाए जाने वाले तिलक के पीछे न सिर्फ धार्मिक आस्था है बल्कि इसके कुछ वैज्ञानिक आधार भी होते हैं।
माथे पर लगाए जाने वाले तिलक के धार्मिक एवं वैज्ञानिक कारणों को जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
1. एकाग्रता
साधु-संत अपनी साधनाआराधना की शुरुआत करने से पहले अपने माथे पर तिलक या त्रिपुण्ड अवश्य लगाते हैं, क्योंकि इसी जगह पर आज्ञा चक्र में उपस्थित पिण्ड में जुड़ी सभी नाड़ियों का समूह होता है। ऐसा करने से मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है।
2.आत्मविश्वास
दोनों भोंहों के बीच माथे पर जहां तिलक लगाते हैं, वह अग्नि चक्र कहलाता है। इस भाग को थर्ड आई भी कहते हैं, क्योंकि यहीं से आपके शरीर में शक्ति का संचार होता है। यही कारण है कि महिलाएं भी अपने माथे पर बिंदी इसी जगह लगाती हैं। इस जगह लिकक लगाने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है।
3.सौभाग्य
तिलक को ईश्वर का प्रसाद माना जाता है, जिसे माथे पर लगाने से ईश्वरीय कृपा बरसती है और व्यक्ति के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
4. समृद्धि
यदि आप आर्थिक परेशानी से जूझ रहें हैं तो आप तिलक के माध्यम से मां लक्ष्मी की कृपा पा सकते हैं। मस्तक पर केसर का तिलक लगाने से सुख-समृद्धि बढ़ती है।
5. शुभता
धार्मिक या फिर कहें ज्योतिष की दृष्टि से देखें तो माथे पर तिलक लगाने से ग्रहों से जुड़े दोष दूर होते हैं और उनके शुभ फल प्राप्त होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर दिन के अलग-अलग स्वामी ग्रह होते हैं। जिनका प्रभाव हमारे ऊपर होता है। ऐसे में यदि वार के अनुसार तिलक लगाया जाए तो उस दिन से संबंधित ग्रह को अनुकूल बनाया जा सकता है।
ग्रहों की शुभता पाने के लिए कौन सा लगाएं तिलक, जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
दिन — स्वामी ग्रह — तिलक
सोमवार — चन्द्रमा — श्रीखंड, चंदन अथवा दही
मंगलवार — मंगल — रक्त चंदन अथवा सिंदूर
बुधवार — बुध — सिंदूर
गुरूवार — बृहस्पति — केसर, हल्दी, अथवा गोरोचन
शुक्रवार — शुक्र — सिंदूर अथवा रक्त चंदन
शनिवार — शनि — भभूत अथवा रक्त चंदन
रविवार — सूर्य — श्रीखंड, चंदन अथवा रक्त चंदन