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Sheetala Ashtami 2020: शीतला अष्टमी व्रत आज, यह व्रत संक्रमित रोगों को करता है दूर

Mon, 16 Mar 2020 07:30 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 16 Mar 2020 07:30 AM IST
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Sheetala Ashtami 2020 know scientific reason of Sheetala Ashtami fast
शीतला अष्टमी 2020

शीतला अष्टमी व्रत 16 मार्च को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बसोड़ा पूजन किया जाता है। इस व्रत को बसौड़ा व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत धार्मिक और वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां शीतला अष्टमी व्रत माता शीतला के प्रति उनके भक्तों की आस्था, श्रद्धा और समर्पण को दिखाता है। तो वहीं दूसरी ओर, इस व्रत को करने से तमाम तरह की बीमारियां भी दूर होती हैं।

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पौराणिक शास्त्रों में मां शीतला का वर्णन
स्कंद पुराण में शीतला अष्टमी और मां शीतला की महत्ता का उल्लेख है। हालांकि कई लोग इसे सप्तमी के दिन मनाते हैं और कई जगहों पर यह पर्व अष्टमी के दिन मनाया जाता है। दोनों ही दिन माता शीतला को समर्पित हैं। महत्वपूर्ण यह है कि माता शीतला का पूजन किया जाए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शीतला माता का स्वरूप अत्यंत शीतल है, जो रोग-दोषों को हरण करने वाली हैं। माता के हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते हैं और वे गधे की सवारी करती हैं। मुख्य रूप से इनकी उपासना गर्मी के मौसम में की जाती है। 
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यह व्रत इन बीमारियों को करता है दूर
वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार, शीतला अष्टमी के दिन शीतला मां का पूजन करने से चेचक, खसरा, बड़ी माता, छोटी माता जैसी बीमारियां नहीं होती और अगर हो भी जाए तो उससे जल्द छुटकारा मिलता है। इसलिए इस पर्व का वैज्ञानिक महत्व है। दरअसल, जब मां शीतला के स्वरूप को देखते हैं तो हम पाते हैं कि उनके हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते हैं। 
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इनकी उपासना ग्रीष्म में होती है, जब रोगों के संक्रमण की सर्वाधिक संभावनाएं होती हैं। ऐसे में रोगों से बचने के लिए साफ-सफाई, शीतल जल और एंटीबायोटिक गुणों से युक्त नीम का प्रयोग करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन आखिरी बार आप बासी भोजन खा सकते हैं, इसके बाद से बासी भोजन का प्रयोग बिलकुल बंद कर देना चाहिए। वैज्ञानिक तौर पर देखें तो गर्मी बढ़ने के कारण बासी भोजन के खराब होने की आशंका बढ़ जाती हैं। 

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