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Ekadashi 2023 : पापमोचिनी एकादशी आज, जानिए व्रत की महिमा,पूजाविधि और भगवान विष्णु के प्रभावी मंत्र

Sat, 18 Mar 2023 08:56 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 18 Mar 2023 08:56 AM IST
सार

पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है,ऐसा शास्त्रों में लिखा है। व्रती को एक बार दशमी तिथि को सात्विक भोजन करना चाहिए। मन से भोग-विलास की भावना त्यागकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए।

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Papmochani Ekadashi 2023 Date and Significance Vrat Katha Mantra
Papmochani Ekadashi 2023: पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है,ऐसा शास्त्रों में लिखा है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। क्योंकि व्रत रखने से तन-मन दोनों की शुद्धि होती है। शास्त्रों में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। आज 18 मार्च,शनिवार को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। अनेक शास्त्रों में कहा गया है कि संसार में उत्पन्न होने वाला कोई भी प्राणी ऐसा नहीं है जिससे जाने-अनजाने में कोई पाप नहीं हुआ हो। ईश्वरीय विधान के अनुसार पाप के दंड से बचा जा सकता है अगर पापमोचिनी एकादशी का व्रत किया जाए।
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श्रीविष्णु की चतुर्भुज रूप की करें पूजा
पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है,ऐसा शास्त्रों में लिखा है। व्रती को एक बार दशमी तिथि को सात्विक भोजन करना चाहिए। मन से भोग-विलास की भावना त्यागकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए। स्नान कर स्वच्छ और सात्विक रंगों के वस्त्र धारण करें और फिर मन में व्रत का संकल्प लें। पंचामृत से भगवान विष्णु की मूर्ति को स्नान कराकर पीला चन्दन लगाएं,पुष्प अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने धूप-दीप जलाएं, आरती करें और व्रत की कथा पढ़ें। सात्विक रहते हुए जितना संभव हो 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें। इस दिन घर में विष्णुसहत्रनाम का पाठ करना भी कई गुणा फल देता है। दूसरे दिन द्वादशी को सुबह पूजन के बाद ब्राह्मण या गरीबों को भोजन कराएं, दान-दक्षिणा दें, फिर स्वयं भोजन करें और व्रत का समापन करें।
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व्रत की महिमा
एकादशी तिथि को रात्रि में जागरण करने का बहुत महत्त्व बताया गया है। पदम पुराण के अनुसार जो मनुष्य पापमोचिनी एकादशी का व्रत करते हैं उनका सारा पाप नष्ट हो जाता है।  इस व्रत को करने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। ब्रह्म ह्त्या,सुवर्ण चोरी,सुरापान और गुरुपत्नी गमन जैसे महापाप भी इस व्रत को करने से दूर हो जाते हैं,अर्थात यह व्रत बहुत ही पुण्यमय है । मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सभी प्रकार की मानसिक समस्या दूर हो जाती है।
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भगवान विष्णु के मूल मंत्र

ॐ नमोः नारायणाय॥
उपरोक्त मंत्र भगवान विष्णु का मूल मंत्र है। इस मंत्र का जाप करने से विष्णु जी अवश्य प्रसन्न होते हैं।
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
श्री विष्णु का जो भी साधक इस मंत्र का जाप करते हुए ध्यान लगाता है उसे भगवत कृपा की प्राप्ति होती है।
विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
विष्णु गायत्री मंत्र के जाप से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
*मंगलम भगवान विष्णुः, मंगलम गरुणध्वजः। मंगलम पुण्डरी काक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥


उपरोक्त विष्णु मंत्र जीवन के सभी दुखों को दूर करके जीवन में सुख और समृद्धि प्रदान करता है।
 
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