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Navratri Ashtami Navmi: जानिए कन्या पूजन के साथ एक बालक की क्यों होती है पूजा
Fri, 11 Oct 2024 07:19 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 11 Oct 2024 07:19 AM IST
सार
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी के दिन नौ कन्याओं के साथ एक बालक की भी पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, ये नौ कन्याएं देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक मानी जाती हैं और बालक को "बटुक भैरव" के रूप में पूजा जाता है। बटुक भैरव, भगवान शिव के भैरव रूप का बाल रूप है, जो देवी दुर्गा के रक्षक माने जाते हैं।
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नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Navratri Ashtami Navmi: नवरात्रि पर कन्या पूजन न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से लाभकारी होता है, बल्कि वास्तु दोषों को दूर करने के लिए भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। वास्तु दोष, जो घर की नकारात्मक ऊर्जा या असंतुलित ऊर्जा का संकेत देते हैं, जीवन में कई समस्याओं का कारण बन सकते हैं। कन्या पूजन, जो देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का एक प्रतीकात्मक रूप है, इन दोषों को दूर करने और घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने में सहायक होता है।
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इसलिए होती है बालक की पूजा
विशेषरूप से नवरात्रि की अष्टमी और नवमी के दिन नौ कन्याओं के साथ एक बालक की भी पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, ये नौ कन्याएं देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक मानी जाती हैं और बालक को "बटुक भैरव" के रूप में पूजा जाता है। बटुक भैरव, भगवान शिव के भैरव रूप का बाल रूप है, जो देवी दुर्गा के रक्षक माने जाते हैं।
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नव कन्याओं की पूजा के साथ एक बालक को शामिल करने का उद्देश्य यह है कि देवी की कृपा और शक्ति के साथ भैरव की सुरक्षा भी प्राप्त हो। यह मान्यता है कि देवी दुर्गा की पूजा तभी पूर्ण होती है जब भैरव की पूजा भी की जाए। इसलिए, नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन में एक बालक को सम्मिलित कर इस परंपरा का पालन किया जाता है। यह पूजा संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है, जो भक्तों को देवी की कृपा और सुरक्षा प्रदान करती है। बालक की उपस्थिति से पूजा में सामंजस्य और शक्ति का संचार होता है, जिससे घर और जीवन में समृद्धि और शांति आती है।
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कन्या पूजन और वास्तु दोष निवारण
घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश
कन्या पूजन के दौरान जब नौ कन्याओं को आमंत्रित कर सम्मान और सेवा दी जाती है, तो यह घर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने में सहायक होता है। कन्याओं को देवी का रूप मानकर जब पूजा की जाती है, तो उनकी पवित्रता और दिव्यता घर के वास्तु दोषों को समाप्त करने में सहायता करती है।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार
वास्तु के अनुसार, घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह घर की दिशा, कमरे की संरचना और अन्य तत्वों पर निर्भर करता है। कन्या पूजन के दौरान किए गए हवन और मंत्रोच्चार से उत्पन्न हुई सकारात्मक ऊर्जा घर के हर कोने में फैलती है। इससे घर के वास्तु दोष जैसे दिशा दोष, ऊर्जा असंतुलन आदि दूर होते हैं।
धन और समृद्धि का आगमन
कन्या पूजन करने से घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है, जिससे धन और समृद्धि आती है। जो घर आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए यह पूजन विशेष रूप से लाभकारी होता है।
संतान सुख और मानसिक शांति
कन्या पूजन करने से माता दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो परिवार में संतान सुख और मानसिक शांति लाने में सहायक होता है।
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