Mokshada Ekadashi 2021: मोक्षदा एकादशी पर रखें मौन व्रत, जानिए क्या हैं मौन व्रत रखने की विधि और फायदे
Mokshda Ekadashi 2021: शास्त्रों के अनुसार मोक्षदा एकादशी तिथि के दिन ही द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के दौरान अपने शिष्य अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
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Mokshada Ekadashi 2021: शास्त्रों में मार्गशीर्ष(अगहन) माह को बड़ा ही पावन महीना माना गया है। इस महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा या मौनी एकादशी भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार मोक्षदा एकादशी तिथि के दिन ही द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के दौरान अपने शिष्य अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता जैसे महान ग्रंथ का प्रादुर्भाव होने के कारण इस दिन को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। गीता का ज्ञान हमें दुःख, क्रोध, लोभ व अज्ञानता के दलदल से बाहर निकालने के लिए प्रेरित करता है। सत्य, दया, प्रेम और सत्कर्म को अपने जीवन में धारण करने वाला प्राणी ही मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। आज के दिन मौन रखने का भी विधान धर्मग्रंथों में बताया गया है।
मौन रहने के लाभ
मौन की महिमा अपार है,इसे धारण करना तप करने के बराबर है। मौन से क्रोध का दमन,वाणी का नियंत्रण शरीरबल,संकल्प बल एवं आत्मबल में वृद्धि,मन को शांति तथा मस्तिष्क को विश्राम मिलता है जिससे आंतरिक शक्तियों का विकास होता है और ऊर्जा का क्षरण रुकता है।आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी वाणी का शुद्ध और सरल होना अति आवश्यक है। मौन से वाणी शुद्ध और नियंत्रित होती है व यह हमारे सोचने-समझने की शक्ति को विकसित करता है इसलिए हमारे शास्त्रों में मौन का विधान बताया गया है। ऋषि-मुनि या चिंतक मौन रहकर ही मनन-चिंतन करते हैं इससे उनकी मानसिक ऊर्जा बढ़ती है। मौन रहकर कार्य करने से ज्ञानेन्द्रियाँ व कामेन्द्रियाँ एकाग्र होती हैं और कार्य सुचारु रूप से संपन्न होता है। तभी तो पूजा-अनुष्ठानों में मौन रहकर कार्य किया जाता है। मनोविज्ञानी भी एकाग्रता,स्मरण शक्ति बढ़ाने,मन को मजबूत बनाने एवं सकारात्मक सोच के लिए मौन रखने की सलाह देते हैं।दैनिक जीवन में भी कार्य करते समय बोलने और मौन रखने का अंतर समझा जा सकता है।जो व्यक्ति मौन रहते हैं उनकी बुद्धि अपेक्षाकृत अधिक स्थिर एवं संतुलित होती है,ऐसा व्यक्ति हानि-लाभ,हित-अहित के प्रसंगों पर भी बड़े धैर्यपूर्वक निर्णंय ले सकता है।
कैसे करें मौन व्रत
इस दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व स्न्नान करके मौन व्रत का संकल्प लें। इस दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करते रहें ।या फिर अपने मन में राधे-कृष्ण या राम-राम रटते रहें। मौन रहकर इस दिन श्रीमदभगवत गीता की सुगंधित फूलों से पूजा कर,गीता का पाठ करना चाहिए। गीता पाठ करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होकर उसे धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।शास्त्रों के अनुसार प्रातःकाल और सायंकाल मनुष्य को जितनी देर हो सके मौन अवश्य रखना चाहिए।ऐसा करने से मानसिक तनाव तो कम होता ही है साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होता है एवं मन को शांति व मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। जिन्हें मन को वश में रखना हो व अपने आप पर नियंत्रण साधना हो उन्हें नियमित रूप से कुछ समय के लिए मौन रहने का अभ्यास अवश्य करना चाहिए।