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Makar Sankranti 2019: जानें 14 के बजाय 15 जनवरी को क्यों मनाई जाएगी मकर संक्रांति
Mon, 07 Jan 2019 12:57 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 07 Jan 2019 12:57 PM IST
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मकर संक्रांति 2019
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Makar Sankranti 2019: परांपरागत रूप से प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। लेकिन पिछले कई साल से संक्रांति की तिथि को लेकर उलछने बनी रहती है। पिछले साल भी मकर संक्रान्ति की तिथि को लेकर असमंजस था कि मकर संक्रांति 14 या 15 को किस तारीख पर मनाई जाए। इस बार भी साल 2019 में तारीख को लेकर असंमजस है। कई ज्योतिषी, पंचांग और हिन्दू कैलेंडर मकर संक्रांति की तिथि 14 तारीख बता रहे हैं तो कई 15 जनवरी को।
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मकर संक्रांति की सही तिथि
ज्योतिष गणना के अनुसार जब भी सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है उस दिन मकर संक्रांति होती है। इस बार सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी की शाम को 7 बजकर 28 मिनट पर प्रवेश करेगा। दरअसल जब भी सूर्य मकर राशि में शाम को प्रवेश करता है तो उसके अगले दिन ही मकर संक्रांति मनाई जाती है , इसलिए इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी।
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मकर संक्रांति दान शुभ मुहूर्त
प्राय: हर साल 14 जनवरी को ही सूर्यदेव अपनी कक्षा परिवर्तित कर दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, लेकिन इस साल पर्व 14 के बजाए 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इस साल भगवान सूर्य 14 जनवरी को शाम 7.28 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मगर तब तक सूर्यास्त हो चुका होगा। ऐसे में लोगों में मकर संक्रांति पर्व की तिथि को लेकर दुविधा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पुण्यकाल में पूजा-पाठ और दान करना शुभ फलदायी होता है। चूंकि सूर्य का 14 जनवरी की शाम को राशि परिवर्तन हो रहा है इसलिए दान-पुण्य का सही समय 15 जनवरी को ही होगा। चूंकि सूर्य का राशि परिवर्तन सूर्यास्त के बाद होगा, इसके चलते पुण्यकाल और मकर संक्रांति के तहत 15 जनवरी को दान पुण्य का दौर होगा।
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मकर संक्रांति का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भगवान सूर्यदेव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे संक्रमण या संक्रांति कहा जाता है। संक्रांति का नामकरण उस राशि से होता है, जिस राशि में सूर्यदेव प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव धनु राशि से अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति पर्व का निर्धारण सूर्य की गति के अनुसार होता है।
मान्यता है कि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश शाम या रात्रि को होगा, तो इस स्थिति में पुण्यकाल अगले दिन स्थानांतरित हो जाता है। शास्त्रों में उदय काल (सूर्योदय) को ही महत्व दिया गया है। ऐसे में उदयकालीन तिथि की मान्यता के अनुसार 15 जनवरी को ही सूर्योदय से लेकर दोपहर 11.28 बजे तक मकर संक्रांति पर्व का पुण्य काल रहेगा। इस दिन गंगा स्नान के लिए तीर्थ स्थल और संगम तटों पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़कर स्नान-दान का पुण्य लाभ अर्जित करता है।
सूर्य के उत्तरायण होने से मनुष्य की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। उदयकालीन तिथि के अनुसार 15 जनवरी को ही सूर्योदय काल से दोपहर 11.28 बजे तक मकर संक्रांति के पुण्य काल में स्नान दान किया जाना लाभदायक है।