{"_id":"65a0c221d022dfb20c0d9dc5","slug":"makar-sankranti-2024-mythological-stories-related-to-makar-sankranti-and-rashi-anusar-daan-2024-01-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Makar Sankranti 2024: क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति? जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं और राशि अनुसार दान","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Makar Sankranti 2024: क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति? जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं और राशि अनुसार दान
Sun, 14 Jan 2024 09:38 AM IST
आशिकी पटेल
पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य
पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य
Published by: आशिकी पटेल
Updated Sun, 14 Jan 2024 09:38 AM IST
सार
Makar Sankranti 2024: यह भी कहा जाता है कि गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी।
विज्ञापन
मकर संक्रांति से जुड़ी पौराणिक कथायें
- फोटो : iStock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Makar Sankranti 2024: ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाया करते हैं। शनिदेव चूंकि मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा उनसे मिली थीं।
विज्ञापन
यह भी कहा जाता है कि गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।
विज्ञापन
Makar Sankranti 2024: भारत के अलग-अलग राज्यों में खास अंदाज से मनाई जाती है मकर संक्रांति, जानें सबके बारे में
विज्ञापन
महाभारत काल के महान योद्धा भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी आदि खाकर मनाया जाता है, जबकि गुजरात में यह पर्व पतंगोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार इस पर्व के पकवान भी अलग-अलग होते हैं, लेकिन दाल और चावल की खिचड़ी इस पर्व की प्रमुख पहचान बन चुकी है। विशेष रूप से गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है, इसलिए उत्तर भारत में इस पर्व को 'खिचड़ी 'के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा तिल और गुड़ का भी मकर संक्रांति पर बेहद महत्व है।
मकर संक्रांति पर दान का बहुत महत्व है। विशेषकर इस दिन तिल, खिचड़ी, गुड़ एवं कंबल दान करने का महत्व है।
Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति पर क्या है स्नान और दान का महत्व?
राशि के अनुसार दान
- मेष - जल में पीले पुष्प, हल्दी, तिल मिलाकर अर्घ्य दें। तिल-गुड़ का दान करें।
- वृष - जल में सफेद चंदन, दूध, श्वेत पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। खिचड़ी का दान करें।
- मिथुन - जल में तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। मूंग की दाल की खिचड़ी दान करें।
- कर्क- जल में दूध, चावल, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। संकटों से मुक्ति मिलेगी। गुड़, तिल दान करें।
- सिंह- जल में कुमकुम तथा रक्त पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। गुड़, तिल दान करें।
- कन्या- जल में तिल, दूर्वा, पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। मूंग की दाल की खिचड़ी बनाकर दान करें। गाय को चारा दें।
- तुला- सफेद चंदन, दूध, चावल का दान दें। सफेद चंदन मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें |
- वृश्चिक- जल में कुमकुम, रक्तपुष्प तथा तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गुड़ का दान दें।
- धनु- जल में हल्दी, केसर, पीले पुष्प मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गुड़ दान करें।
- मकर- जल में नीले पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। काले तिल, उड़द की दाल की खिचड़ी दान करें।
- कुंभ- जल में नीले पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। उड़द, तिल का दान करें।
- मीन- हल्दी, केसर, पीले फूल के साथ तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। तिल, गुड़ का दान करें।