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Makar Sankranti 2019: जानिए क्यों सभी 12 संक्रांतियों में मकर संक्रांति होती है सबसे खास
Thu, 10 Jan 2019 12:48 PM IST
kapil kumar
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: kapil kumar
Updated Thu, 10 Jan 2019 12:48 PM IST
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मकर संक्रांति 2019
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ज्योतिष गणना के अनुसार जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो उस दिन मकर संक्रांति कहा जाता है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। इसलिए मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है। इसके अलावा मकर संक्रांति पर राशिच्रक में काफी महत्तवपूर्ण परिवर्तन होता है। वर्ष में 12 संक्रातियां आती हैं, लेकिन उनमें से सबसे अधिक खास मकर संक्रांति को दिया जाता है। आप जानते हैं ऐसा क्यों?
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दरअसल मकर संक्रांति को खेत-खलियानों, फसलों से जुड़े हुए त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है। असल में मकर संक्रांति वह समय है, जब हमारे खेतों में फसलें तैयार हो चुकी होती है और हम फसलों के तैयार हो जाने की खुशियां मनाते हैं। संक्रांति के दिन ही हम हर उन चीजों का आभार प्रकट करते हैं, जिसने खेती तथा फसल उगाने में हमारी सहायता की है।
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खेती करने में कृषि से जुड़े हुए पशुओं का एक महत्वपूर्ण और बड़ा योगदान होता है, इनके बिना तो खेती करना असंभव सा है, इसलिए उनके लिए भी मकर संक्रांति का एक दिन होता है।
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मकर संक्रांति का पहला दिन धरती का, दूसरे दिन मानव का और तीसरे दिन मवेशियों का होता है। धरती को प्रथम स्थान इसलिए दिया गया है, क्योंकि धरती से ही हमारा अस्तित्व है। इसलिए मकर संक्रांति को फसलों का त्योहार भी कहते है।
मकर संक्रांति पर करें ये उपाय
- मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान के पश्चात जल में रोली, लाल रंग का फूल तथा तिल मिलाकर सूर्य को तीन बार अर्घ्य दें।
- सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात् सूर्य के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप या आदित्य हृदय स्तोत्रम् का तीन बार पाठ करें।
- बाकी दिनों में सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए उगते हुए सूर्य की अथवा सूर्योदय के एक घंटे के भीतर तांबे के पात्र से अर्घ्य दें।
- अर्घ्य देने से पूर्व जल में रोली, चावल और लाल फूल डालना न भूलें।
- सूर्यदेव की साधना सदैव पूर्व की दिशा की तरफ मुख करके ही करें।
- जल के पात्र को सिर के उपर उठाकर ही सूर्य को अर्घ्य दें।
- मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए तिल, गुड़, लाल चंदन, लाल कपड़ा और तांबे के बर्तन का दान करें।