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Mahashivratri 2024: 8 मार्च को महाशिवरात्रि, जानिए शिवलिंग पूजन का महत्व और पूजाविधि
Sat, 02 Mar 2024 12:41 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 02 Mar 2024 12:41 PM IST
सार
महाशिवरात्रि मनुष्य के लिए शिवजी की कृपा प्राप्त करने का पवित्र दिन भी है। इस दिन जो मनुष्य परमसिद्धिदायक भगवान भोलेनाथ की उपासना करता है वह परम भाग्यशाली होता है।
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महाशिवरात्रि 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Mahashivratri 2024: हिंदू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का पावन पर्व 8 मार्च, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का विधान है। भगवान शिव मात्र पौराणिक देवता ही नहीं, अपितु वे पंचदेवों में प्रधान,अनादि सिद्ध परमेश्वर हैं और निगमागम आदि सभी शास्त्रों में महिमामंडित महादेव हैं। वेदों ने इस परम तत्व को अव्यक्त, अजन्मा, सबका कारण, पालक और संहारक कहकर उनका गुणगान किया है। भगवान शिव के लिंग और मूर्ति, दोनों की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि शिव ब्रह्मरूप होने के कारण निराकार और रूपवान होने के कारण साकार कहे गए हैं। शिवरात्रि व्रत परम मंगलमय और दिव्यतापूर्ण है। यह व्रत चारों पुरुषार्थों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला माना गया है।
शिवलिंग पूजन का महत्व
शिवपुराण के अनुसार शिवजी के निराकार स्वरूप का प्रतीक 'लिंग' इसी पावन तिथि की महानिशा में प्रकट होकर सर्वप्रथम ब्रह्मा और विष्णु के द्वारा पूजित हुआ था। मान्यता के अनुसार जो भक्त शिवरात्रि को दिन-रात निराहार एवं जितेन्द्रिय होकर अपनी पूर्ण शक्ति एवं सामर्थ्य द्वारा निश्छल भाव से शिवजी की यथोचित पूजा करता है वह वर्ष-पर्यन्त शिव पूजन करने का सम्पूर्ण फल तत्काल प्राप्त कर लेता है। जैसे पूर्ण चन्द्रमा का उदय समुद्र की वृद्धि का अवसर है,उसी प्रकार यह महाशिवरात्रि तिथि धर्म की वृद्धि का समय है।
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महाशिवरात्रि मनुष्य के लिए शिवजी की कृपा प्राप्त करने का पवित्र दिन भी है। इस दिन जो मनुष्य परमसिद्धिदायक भगवान भोलेनाथ की उपासना करता है वह परम भाग्यशाली होता है। शिवलिंग का पूजन-अभिषेक करने से सभी देवी-देवताओं के अभिषेक का फल उसी क्षण प्राप्त हो जाता है। भगवान शिव हमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर आदि विकारों से मुक्त करके परम सुख शान्ति और ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
महाशिवरात्रि की पूजा विधि
भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु प्रातः स्नानादि करके शिवमंदिर जाएं। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक करें। पूजा में चन्दन ,मोली ,पान, सुपारी, अक्षत, पंचामृत, बिल्वपत्र, धतूरा, फल-फूल, नारियल, इत्यादि शिवजी को अर्पित करे। भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बेल को धोकर चिकने भाग की ओर से चंदन लगाकर चढ़ाएं। हो सके तो रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शंकर की पूजा अर्चना करनी चाहिए। अभिषेक के जल में पहले प्रहर में दूध,दूसरे में दही ,तीसरे में घी, और चौथे में शहद को शामिल करना चाहिए।दिन में केवल फलाहार करें, रात्रि में उपवास करें । हांलाकि रोगी, अशक्त और वृद्धजन रात्रि में भी फलहार कर सकते है। इस दिन शिव की पूजा करने से जीव को अभीष्ट फल की प्राप्ति अवश्य होती है। पूजा में शिवपंचाक्षर मंत्र यानी ऊं नम: शिवाय का जाप करें।
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शिवलिंग पूजन का महत्व
शिवपुराण के अनुसार शिवजी के निराकार स्वरूप का प्रतीक 'लिंग' इसी पावन तिथि की महानिशा में प्रकट होकर सर्वप्रथम ब्रह्मा और विष्णु के द्वारा पूजित हुआ था। मान्यता के अनुसार जो भक्त शिवरात्रि को दिन-रात निराहार एवं जितेन्द्रिय होकर अपनी पूर्ण शक्ति एवं सामर्थ्य द्वारा निश्छल भाव से शिवजी की यथोचित पूजा करता है वह वर्ष-पर्यन्त शिव पूजन करने का सम्पूर्ण फल तत्काल प्राप्त कर लेता है। जैसे पूर्ण चन्द्रमा का उदय समुद्र की वृद्धि का अवसर है,उसी प्रकार यह महाशिवरात्रि तिथि धर्म की वृद्धि का समय है।
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MahaShivratri 2024: महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप, महादेव हर मनोकामना करेंगे पूरी
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भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु प्रातः स्नानादि करके शिवमंदिर जाएं। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक करें। पूजा में चन्दन ,मोली ,पान, सुपारी, अक्षत, पंचामृत, बिल्वपत्र, धतूरा, फल-फूल, नारियल, इत्यादि शिवजी को अर्पित करे। भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बेल को धोकर चिकने भाग की ओर से चंदन लगाकर चढ़ाएं। हो सके तो रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शंकर की पूजा अर्चना करनी चाहिए। अभिषेक के जल में पहले प्रहर में दूध,दूसरे में दही ,तीसरे में घी, और चौथे में शहद को शामिल करना चाहिए।दिन में केवल फलाहार करें, रात्रि में उपवास करें । हांलाकि रोगी, अशक्त और वृद्धजन रात्रि में भी फलहार कर सकते है। इस दिन शिव की पूजा करने से जीव को अभीष्ट फल की प्राप्ति अवश्य होती है। पूजा में शिवपंचाक्षर मंत्र यानी ऊं नम: शिवाय का जाप करें।