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अजा एकादशी पर विष्णु पूजा के दौरान सुनें ये पावन कथा, भगवान विष्णु की कृपा से मिटेंगे सभी दोष

Mon, 07 Sep 2026 06:01 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 07 Sep 2026 06:01 AM IST
सार

आज 7 सितंबर 2026 है और अजा एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विष्णु कथा सुनने से पाप-दोष दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

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Aja Ekadashi 2026 Listen to This Auspicious Katha During Vishnu Puja to Remove All Doshas
अजा एकादशी व्रत कथा - फोटो : adobe stock

विस्तार

इस साल अजा एकादशी का व्रत आज यानी 7 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। एकादशी व्रत में कथा का पाठ और श्रवण भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि कथा सुने या पढ़े बिना एकादशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। आइए जानते हैं अजा एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा।

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अजा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, अयोध्या में राजा हरिश्चन्द्र का शासन था। वह अपनी सत्यनिष्ठा, धर्मपरायणता और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार देवताओं ने उनकी सत्य की परीक्षा लेने का विचार किया। इसी क्रम में राजा ने स्वप्न में देखा कि उन्होंने अपना पूरा राजपाट ऋषि विश्वामित्र को दान कर दिया है।

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अगले दिन ऋषि विश्वामित्र वास्तव में राजा के पास पहुंचे और उन्हें उनके स्वप्न की याद दिलाते हुए राज्य दान करने की बात कही। राजा हरिश्चन्द्र ने अपने सत्यव्रत का पालन करते हुए बिना किसी संकोच के अपना समस्त राज्य ऋषि को सौंप दिया। इसके बाद दक्षिणा देने की आवश्यकता पड़ी तो राजा को अपनी पत्नी और पुत्र सहित स्वयं को भी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा।

कहा जाता है कि राजा को एक चाण्डाल ने खरीद लिया था और वह उसके यहां दाह संस्कार के लिए आने वाले लोगों से कफन का शुल्क लेने का काम करने लगे। इतने कठिन हालात में भी राजा ने सत्य का साथ नहीं छोड़ा। लंबे समय तक इसी तरह जीवन बिताने के बाद वह अपने दुखों और कष्टों से बेहद परेशान हो गए और मुक्ति का मार्ग खोजने लगे।

एक दिन जब राजा इसी चिंता में बैठे थे, तभी महर्षि गौतम वहां पहुंचे। राजा ने उन्हें अपने जीवन में आई सभी परेशानियों और कष्टों के बारे में बताया। उनकी स्थिति सुनकर महर्षि गौतम ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को अपने कष्टों से मुक्ति मिलती है।

राजा हरिश्चन्द्र ने महर्षि गौतम के बताए अनुसार अजा एकादशी का व्रत रखा, भगवान विष्णु की पूजा की और रातभर जागरण किया। मान्यता है कि व्रत के प्रभाव से उनके सभी पाप नष्ट हो गए और उनके जीवन के दुख दूर होने लगे। उन्हें दोबारा अपना राज्य प्राप्त हुआ और परिवार के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करने का अवसर मिला। अंत समय में राजा हरिश्चन्द्र अपने परिवार सहित स्वर्ग लोक को प्राप्त हुए।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक अजा एकादशी का व्रत करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं और उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इतना ही नहीं, अजा एकादशी व्रत कथा का श्रद्धा से श्रवण करने मात्र से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल मिलने की मान्यता भी प्रचलित है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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