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Mahalaxmi Vrat 2020: महालक्ष्मी व्रत की इस कथा को सुनकर मिलता धन और वैभव
Thu, 10 Sep 2020 06:06 PM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Thu, 10 Sep 2020 06:06 PM IST
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महालक्ष्मी व्रत कथा: जिसे सुनकर धन की देवी का मिलता है आशीर्वाद
- फोटो : सोशल मीडिया
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Mahalaxmi Vrat 2020: महालक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए विधिनुसार किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल यह व्रत भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ हो जाते हैं और 16 दिनों तक व्रत रखे जाते हैं। पितृ पक्ष की अष्टमी तिथि में व्रत का समापन होता है। व्रत का फल जातक को तभी प्राप्त होता है जब वह व्रत में गज लक्ष्मी व्रत कथा को सुनता है। गज लक्ष्मी व्रत कथा इस प्रकार है..
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महालक्ष्मी व्रत कथा (mahalaxmi vrat katha)
एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह नियमित रुप से जगत के पालनहार विष्णु भगवान की अराधना करता था। उसकी पूजा-भक्ति से प्रसन्न होकर उसे भगवान श्रीविष्णु ने दर्शन दिए और ब्राह्मण से वर मांगने के लिए कहा। तब ब्राह्मण ने लक्ष्मीजी का निवास अपने घर में होने की इच्छा जाहिर की। तब श्रीविष्णु ने लक्ष्मीजी की प्राप्ति का मार्ग बताया। उन्होंने बताया कि मंदिर के सामने एक स्त्री आती है, जो यहां आकर उपले थापती है, तुम उसे अपने घर आने का आमंत्रण देना। वही देवी लक्ष्मी हैं।
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विष्णु जी ने ब्राह्मण से कहा, जब धन की देवी मां लक्ष्मी के तुम्हारे घर पधारेंगी तो तुम्हारा घर धन और धान्य से भर जायेगा। यह कहकर श्रीविष्णु जी चले गए। अगले दिन वह सुबह ही वह मंदिर के सामने बैठ गया। लक्ष्मी जी उपले थापने के लिये आईं तो ब्राह्मण ने उनसे अपने घर आने का निवेदन किया। ब्राह्मण की बात सुनकर लक्ष्मीजी समझ गईं, कि यह सब विष्णुजी के कहने से हुआ है।
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लक्ष्मीजी ने ब्राह्मण से कहा कि मैं चलूंगी तुम्हारे घर लेकिन इसके लिए पहले तुम्हें महालक्ष्मी व्रत करना होगा। 16 दिनों तक व्रत करने और 16वें दिन रात्रि को चंद्रमा को अर्घ्य देने से तुम्हारा मनोरथ पूरा होगा। ब्राह्मण ने देवी के कहे अनुसार व्रत और पूजन किया और देवी को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पुकारा। इसके बाद देवी लक्ष्मी ने अपना वचन पूरा किया। मान्यता है कि उसी दिन से इस व्रत की परंपरा शुरू हुई थी।