फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   kamika ekadashi 2023 date time importance vrat katha

Kamika Ekadashi 2023: कामिका एकादशी कल, जानिए पूजाविधि, कथा और व्रत का महत्व

Wed, 12 Jul 2023 01:32 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 12 Jul 2023 01:32 PM IST
सार

कामिका एकादशी के स्मरण मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है और जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना में मन लगाता है उसके सभी पाप मिट जाते हैं।

विज्ञापन
kamika ekadashi 2023 date time importance vrat katha
Kamika Ekadashi 2023: एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों एवं स्वरूपों का ध्यान करते हुए इनकी पूजा करनी चाहिए। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि भगवान विष्णु के आराध्य श्री शिव हैं और भगवान शिव के आराध्य श्री विष्णु। ऐसे में श्रावण मास में आने वाली कामिका एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस वर्ष यह एकादशी 13 जुलाई, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। यह व्रत करने से भगवान विष्णु के साथ-साथ शिवजी की भी असीम कृपा प्राप्त होती है। इस एकादशी के स्मरण मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है और जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना में मन लगाता है उसके सभी पाप मिट जाते हैं और व्यक्ति उत्तम लोक में स्थान प्राप्त करने योग्य बन जाता है।

विज्ञापन


पूजा विधि और दीपदान का महत्व
इस दिन शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु की श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव और मधुसूदन आदि नामों से भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पुराणों में भगवान कृष्ण ने कहा है कि कामिका एकादशी के दिन जो व्यक्ति भगवान के सामने घी अथवा तिल के तेल का दीपक जलाता है, उनके पितर स्वर्गलोक में अमृत का पान करते हैं। इस दिन मंदिर, तुलसी के नीचे, पीपल और केले की जड़ में, नदियों के किनारे और संध्या काल में खुले आसमान के नीचे जो प्राणी दीपदान करता है उसे अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है। 
विज्ञापन
इस एकादशी के व्रत की विधि दशमी से ही शुरू हो जाती है। इस दिन से ही व्रत रखने वाले को सात्विक भोजन करना चाहिए और वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। एकादशी के दिन सुबह स्नान करके विष्णु भगवान की पूजा धूपदीप, फल, फूल और नैवेद्य से करना अति उत्तम फल प्रदान करता है। व्रत रखने वाले को एकादशी की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का यथासंभव जप करें और इस दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। शास्त्रों के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत करने वाला मनुष्य रात्रि में जागरण करके न तो कभी यमराज का दर्शन करता है और न ही कभी उसे नरकगामी होना पड़ता है।

कामिका एकादशी की कथा
प्राचीन काल में एक गांव में एक ठाकुर थे। ठाकुर का एक ब्राह्मण से झगड़ा हो गया और क्रोध में आकर ठाकुर ने ब्राह्मण की हत्या कर दी। बाद में उसे अपने किए पर पछतावा होने लगा। अपराध की क्षमा याचना के लिए ठाकुर ने ब्राह्मण का क्रिया कर्म करना चाहा। परन्तु पंडितों ने क्रिया कर्म में शामिल होने से मना कर दिया और वह ब्रह्म हत्या का दोषी बन गया। तब ठाकुर ने एक मुनि से निवेदन किया कि हे भगवान, मेरा पाप कैसे दूर हो सकता है। इस पर मुनि ने उसे कामिका एकादशी व्रत करने की सलाह दी। ठाकुर ने नियम पूर्वक एकादशी का व्रत किया। रात में भगवान की मूर्ति के पास जब वह सो रहा था, तभी उसे सपने में भगवान के दर्शन हुए। भगवान ने कहा कि मैंने तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दिया है। इस तरह ठाकुर ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त होकर अंत में वैकुण्ठ लोक गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed