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कब है कजरी तीज 30 या 31 अगस्त, जानिए पूजा विधि और क्यों मनाया जाता है यह पर्व
Sat, 29 Aug 2026 07:05 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 29 Aug 2026 07:05 PM IST
सार
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को रात 9 बजकर 39 मिनट से होगी ,जिसका समापन 31 अगस्त को रात 8 बजकर 53 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर कजरी तीज का त्योहार 31 अगस्त को मनाया जाएगा।
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Kajari Teej 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का त्योहार मनाया जाता है। कजरी तीज पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुख वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विधि-विधान के साथ करने की परंपरा होती है। इसके अलावा कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना के लिए कजरी तीज का व्रत रखती हैं। इस साल तृतीया तिथि दो दिन होने के कारण संशय की स्थिति बनी हुई है कि कजरी तीज 30 को या 31 अगस्त को है। आइए जानते हैं सही तिथि, पूजा शुभ मुहूर्त और विधि।
कजरी तीज 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को रात 9 बजकर 39 मिनट से होगी ,जिसका समापन 31 अगस्त को रात 8 बजकर 53 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर कजरी तीज का त्योहार 31 अगस्त को मनाया जाएगा।
कजरी तीज पूजा विधि
- भाद्रपद माह की तृतीया पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- फिर पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान शिव, मां पार्वती की पूजा के साथ नीमड़ी माता की पूजा शुरू करें।
-पूजा स्थल को सजाकर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- भगवान शिव को गंगाजल, दूध, शहद, दही और बेलपत्र अर्पित करें।
- इसके बाद माता पार्वती को सिंदूर, कुमकुम, चूड़ी, बिंदी और श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है।
कजरी तीज पर चंद्रमा को दे अर्घ्य
कजरी तीज पर भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा करने के बाद चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोले। चंद्रोदय होने पर एक लोटे में जल, दूध, रोली अक्षत और फूल से अर्ध्य दें और एक ही जगह खड़े होकर चार बार परिक्रमा करें।
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कजरी तीज का महत्व
सुहागिन महिलाओं के लिए कजरी तीज का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने के से दांपत्य जीवन में मजबूती आती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करके व्रत करती हैं, जो सौभाग्य और समर्पण का प्रतीक है। इस पर्व पर गीत-संगीत और लोक नृत्य का भी विशेष महत्व है, जिसमें महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर झूला झूलती हैं और कजरी गीत गाती हैं।सितंबर 2026 का मासिक राशिफल: बदलेगी इन राशियों की किस्मत, जानें 12 राशियों के लिए कैसा बीतेगा माह?
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कजरी तीज 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को रात 9 बजकर 39 मिनट से होगी ,जिसका समापन 31 अगस्त को रात 8 बजकर 53 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर कजरी तीज का त्योहार 31 अगस्त को मनाया जाएगा।
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कजरी तीज पूजा विधि
- भाद्रपद माह की तृतीया पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- फिर पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान शिव, मां पार्वती की पूजा के साथ नीमड़ी माता की पूजा शुरू करें।
-पूजा स्थल को सजाकर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- भगवान शिव को गंगाजल, दूध, शहद, दही और बेलपत्र अर्पित करें।
- इसके बाद माता पार्वती को सिंदूर, कुमकुम, चूड़ी, बिंदी और श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है।
कजरी तीज पर चंद्रमा को दे अर्घ्य
कजरी तीज पर भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा करने के बाद चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोले। चंद्रोदय होने पर एक लोटे में जल, दूध, रोली अक्षत और फूल से अर्ध्य दें और एक ही जगह खड़े होकर चार बार परिक्रमा करें।
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कजरी तीज का महत्व
सुहागिन महिलाओं के लिए कजरी तीज का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने के से दांपत्य जीवन में मजबूती आती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करके व्रत करती हैं, जो सौभाग्य और समर्पण का प्रतीक है। इस पर्व पर गीत-संगीत और लोक नृत्य का भी विशेष महत्व है, जिसमें महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर झूला झूलती हैं और कजरी गीत गाती हैं।