{"_id":"5bd55e0dbdec2269c33c52cd","slug":"holy-significance-of-kartik-month-and-importance-of-donation","type":"story","status":"publish","title_hn":"कार्तिक मास : जानें मोक्ष और मनोकामना के लिए किस चीज का करें दान","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
कार्तिक मास : जानें मोक्ष और मनोकामना के लिए किस चीज का करें दान
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 28 Oct 2018 12:28 PM IST
विज्ञापन
kartik mass 2018
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहते हैं कि करेंगे दान तो होगा कल्याण। मान्यता है कि दान में दी जाने वाली वस्तुओं, पदार्थों, द्रव्यों में देवता विराजमान रहते हैं और सभी पदार्थों के अधिष्ठाता देवता भिन्न-भिन्न नाम रूपों वाले हैं। जैसे पृथ्वी के शिव, आकाश के विष्णु, अग्नि के महेश्वरी, वायु के सूर्य, जल के देव गणेश हैं। वेद-पुराण, शास्त्रों में दान-पुण्य से होने वाले कल्याण की महत्ता का वर्णन किया गया है। तमाम कामनाओं और ग्रहों के अनुरूप दान के अलावा बारह मास के हिसाब से भी दान का अपना अलग महत्व है।
विज्ञापन
कार्तिक मास का महत्व
मासानां कार्तिक: श्रेष्ठ:। अर्थात् 12 मासों में कार्तिक मास सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस पावन मास में कई उत्सव और पर्व पड़ते हैं। साथ ही इसी महीने तमाम तरह की कामनाओं के लिए अलग-अलग दान का विधान है। आईये जानते हैं कार्तिक मास में आखिर किन चीजों का दान किया जाता है।
विज्ञापन
कार्तिक मास के प्रमुख पर्व
कार्तिक मास में करवा चौथ, धनतेरस, गोवत्स द्वादशी, गोत्रीरात्र व्रत, नरक चतुर्दशी, हनुमत जयंती, दीपावली, अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, यम द्वितीया, सूर्य षष्ठी, गोपाष्टमी, अक्षय नवमी, देवोत्थान एकादशी, तुलसी विवाह, बैकुंठ चतुर्दशी, कार्तिक पूर्णिमा आदि कई पर्व आते हैं।
विज्ञापन
क्या करें दान
कार्तिक मास प्रकाश पर्व एवं दीपदान के लिए जाना जाता है। इस माह में हमें प्रतिदिन चने का दान देना चाहिए। इस पावन मास में गोसेवा का काफी महत्व है। इसलिए गोमाता का आशीर्वाद पाने के लिए प्रतिदिन गाय को हरी घास खिलाएं। साथ ही धान्य, बीज, चांदी, दीप, नमक आदि का यथाशक्ति दान करना चाहिए।
इस बात का रखें ध्यान
किसी भी कामना से दिए जाने वाले दान में श्रद्धा और विश्वास का महत्वपूर्ण स्थान होता है। दान देते समय इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि हम जो कुछ भी दान दें उसे देते समय हमारे मन में किसी प्रकार का अहंकार या तिरस्कार की भावना नहीं आना चाहिए। बल्कि भावना ये होनी चाहिए कि हम जो कुछ भी दे रहे हैं वह ईश्वर प्रदत्त है, उसी का है, पुन: उसी को समर्पित कर रहा हूं।