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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Hariyali Amavasya 2025 Date Tithi Importance Kab hai Know Snan Daan Mahatva in Hindi

24 जुलाई को हरियाली अमावस्या, वृक्षों के माध्यम से देवी-देवताओं की पूजा और प्रकृति सेवा का पर्व

Sun, 20 Jul 2025 11:21 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 20 Jul 2025 11:21 AM IST
सार

Hariyali Amavasya 2025: हरियाली अमावस्या का पर्व मुख्य रूप से प्रकृति पूजन का प्रतीक है। हरियाली अमावस्या केवल प्रकृति पूजन नहीं, बल्कि उन वृक्षों के माध्यम से देवी-देवताओं का पूजन है, जिनमें दिव्य शक्तियों का वास माना गया है।

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Hariyali Amavasya 2025 Date Tithi Importance Kab hai Know Snan Daan Mahatva in Hindi
हरियाली अमावस्या का पर्व मुख्य रूप से प्रकृति पूजन का प्रतीक है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Hariyali Amavasya 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। यह दिन प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, हरियाली के संवर्धन और पर्यावरण की रक्षा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन पौधे लगाना न केवल पुण्यदायी कार्य है, बल्कि यह धरती माता की सेवा के समान माना गया है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि  “वृक्षाणां रोपणं पुण्यं सर्वपापप्रणाशनम्”,अर्थात वृक्षारोपण से समस्त पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

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हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व
हरियाली अमावस्या का पर्व मुख्य रूप से प्रकृति पूजन का प्रतीक है। हरियाली अमावस्या केवल प्रकृति पूजन नहीं, बल्कि उन वृक्षों के माध्यम से देवी-देवताओं का पूजन है, जिनमें दिव्य शक्तियों का वास माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन गोवर्धन पर्वत की तलहटी में वृक्षारोपण किया था, जिससे ब्रज भूमि में हरियाली फैली। साथ ही यह दिन शिव-पार्वती की उपासना और ऋषियों की वन परंपरा को सम्मान देने का भी अवसर होता है। ग्रंथों में उल्लेख है कि श्रावण मास में लगाए गए वृक्ष दीर्घायु होते हैं और उनके फल पीढ़ियों तक लाभ देते हैं। यही कारण है कि इस दिन लोग पीपल, बरगद, नीम, आंवला, तुलसी आदि पवित्र वृक्ष लगाते हैं। शास्त्रों में कई ऐसे वृक्षों का उल्लेख मिलता है जो न केवल धार्मिक दृष्टि से पूजनीय हैं, बल्कि पर्यावरण को भी लाभ पहुंचाते हैं।
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1. पीपल
पीपल को अत्यंत पवित्र वृक्ष माना गया है। यह दिन-रात ऑक्सीजन छोड़ता है और वायु को शुद्ध करता है। इसके नीचे ध्यान करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। शास्त्रों में वर्णित है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास इस वृक्ष में होता है।
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2. बरगद
बरगद को 'अक्षय वट' कहा जाता है। यह वृक्ष लंबी उम्र का प्रतीक है और इसकी छाया अत्यंत शीतल होती है। इसकी जटाएं और चौड़ी शाखाएं जैव विविधता को सहारा देती हैं। वट सावित्री व्रत में इस वृक्ष की विशेष पूजा होती है।

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3. नीम
नीम को ‘आरोग्य वृक्ष’ कहा गया है। इसकी पत्तियों, फल और छाल में औषधीय गुण होते हैं। नीम वायुमंडल को कीटाणु मुक्त बनाता है और वातावरण में स्वच्छता बनाए रखता है। धर्मशास्त्रों में इसे शुद्धता का प्रतीक माना गया है।


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4. आंवला
आंवला का वृक्ष विशेषकर आयुर्वेद में पूजनीय है। इसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। इसकी छाया ठंडी होती है और यह मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होता है। आंवला नवमी जैसे व्रत में इसकी पूजा की जाती है।

5. तुलसी
तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय मानी गई है। यह घरों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। तुलसी का पौधा वायु को शुद्ध करता है और इसकी पत्तियां औषधीय होती हैं। विष्णुपूजन में तुलसी का प्रयोग अनिवार्य होता है।
 हरियाली अमावस्या पर इन पवित्र वृक्षों को लगाना धर्म और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाता है। शास्त्रों के अनुसार, वृक्षों की सेवा करने से समस्त तीर्थों के दर्शन का फल प्राप्त होता है और यह जीवन में सुख, शांति व समृद्धि का कारण बनते हैं।


 

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