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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Govardhan Puja 2021 Why Is 56 Bhog Offered To Lord Krishna on Annakut Mahotsav

Govardhan puja 2021:अन्नकूट आज, जानिए क्यों लगाया जाता है भगवान कृष्ण को छप्पन भोग

Fri, 05 Nov 2021 07:16 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला
धर्म डेस्क, अमरउजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 05 Nov 2021 07:16 AM IST
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Govardhan Puja 2021 Why Is 56 Bhog Offered To Lord Krishna on Annakut Mahotsav
गोवर्धन पूजा 2021: अन्नकूट महोत्सव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

त्योहार और व्रत हमारे देश में आस्था का प्रतीक हैं। अपने आप में अथाह आस्था और धार्मिक धारणाओं का समागम लिए हुए हैं एक पर्वत पूजा जिसे “गोवर्धन पूजा” के नाम से जाना जाता है।गोवर्धन पूजा यानि अन्नकूट पर्व दीवाली के अगले दिन मनाया जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि मनाया जाता है। आज गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पर्व मनाया जा रहा है। 

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कब शुरू हुई गोवर्धन पूजा 

गोवर्धन पूजा श्री कृष्ण ने द्वापर शुरू की थी। इस दिन घरों और मंदिरों में गोबर से गोवर्धन की आकृति बना कर पूजन किया जाता है। भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र देव का अहंकार तोड़ने के लिए और वृन्दावन वासियों को बारिश से बचाने के लिए पर्वत अपनी उंगली पर उठा लिया था। 
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श्री कृष्ण ने जब गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाया 

एक बार इंद्र के घमंड को तोड़ने के लिए श्री कृष्ण ने बृज वासियों को इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पूजा करने के लिए कहा। श्री कृष्ण का मानना था गोवर्धन पर्वत के कारण ही उनके पशुओं को चारा मिलता है जिसे खाकर दूध देते हैं। गोवर्धन पर्वत ही बादलों को रोककर बारिश करवाता है, जिसके कारण खेती होती हैं। 
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इससे इंद्र क्रोधित हो गया और मूसलाधार बारिश करनी शुरू कर दी, जिस में सब कुछ बहने लगा श्रीकृष्ण ने तब गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर धारण किया। सभी ब्रज वासियों को उसके नीचे आने को कहा और उनकी रक्षा की। श्री कृष्ण ने लगातार 7 दिन अन्न जल ग्रहण नहीं किया। 
जब इंद्र को पता चला कि श्री कृष्ण विष्णु जी के अवतार हैं तो उन्होंने श्रीकृष्ण से माफी मांगी। इन्द्र देव के क्षमा मांगने के बाद जब श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को पुनः स्थापित किया तो श्री कृष्ण का अन्न जल के बिना रहना मां यशोदा और ब्रज वासियों के लिए बहुत कष्ट प्रद था।  


क्यों बनाया जाता है छप्पन भोग 

ऐसा माना जाता है कि मां यशोदा श्री कृष्ण को एक दिन में आठ पहर भोजन कराती थी। इस लिए उन्होंने सातवें दिन के अंत में हर दिन के आठ पहर (7×8=56) के हिसाब से 56 व्यंजन बना कर श्री कृष्ण  को भोग लगाया। तब से अन्नकूट की परम्परा शुरू हुई।  इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बना कर श्री कृष्ण और गोवर्धन पूजा की जाती है। उसके पश्चात भोग भगवान को लगाएं जाते हैं। इस दिन गाय की पूजा की जाती है।  

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