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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Dhumavati Jayanti On 8 June Know Tithi Puja Muhurat and Significance in Hindi

Dhumavati Jayanti 2022: 8 जून को धूमावती जयंती, जानिए इनका स्वरूप, पूजाविधि, मंत्र और कथा

Mon, 06 Jun 2022 12:58 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 06 Jun 2022 12:58 PM IST
सार

मां धूमावती महाविद्या की पूजा मुख्य रूप से मां के प्राकट्य दिवस व गुप्त नवरात्रों में की जाती हैं। इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

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Dhumavati Jayanti On 8 June Know Tithi Puja Muhurat and Significance in Hindi
Dhumavati Jayanti 2022: मां धूमावती की पूजा विपत्ति से छुटकारा पाने,रोग नाश करने और युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए की जाती है वहीं इनकी पूजा करने से मनुष्य के संकटों का हरण होता हैं - फोटो : Social media

विस्तार

Dhumavati Jayanti 2022: हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मां धूमावती का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है,इस बार यह पर्व 8 जून,बुधवार को मनाया जाएगा। धूमावती को देवी पार्वती का अत्यंत उग्र रूप माना जाता है एवं यह दस महाविद्याओं में से सातवीं महाविद्या हैं। इनका स्वरूप इतना उग्र है कि ये महाप्रलय के दौरान भी मौजूद रहती हैं। जब पूरा ब्रह्मांड नष्ट हो जाता है,काल समाप्त हो जाता है और स्वयं महाकाल भी अंतर्ध्यान हो जाते हैं तब भी देवी वहां अकेली ही मौजूद रहती हैं। देवी का स्वरूप के संबंध में मान्यता है कि धूमावती देवी का स्वरूप बड़ा मलिन और भयंकर प्रतीत होता है। इनका स्वरूप विधवा का है और वाहन कौवा है,इसके अलावा यह श्वेत वस्त्र धारण किए हुए खुले केश रूप में होती हैं। वहीं इनका स्वरूप अत्यंत उग्र होने के बावजूद भी इनकी उपासना कल्याणकारी है।

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पूजाविधि
मां धूमावती महाविद्या की पूजा मुख्य रूप से मां के प्राकट्य दिवस व गुप्त नवरात्रों में की जाती हैं। इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के स्थान को गंगाजल से पवित्र करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां धूमावती की तस्वीर को सामने रखकर उन्हें जल, पुष्प,सिन्दूर, कुमकुम, अक्षत, फल, धूप, दीप और नैवैद्य अर्पित कर माता की आरती करें। 
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धूमावती माता का मंत्र-
ऊँ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा:।।

पूजा का फल

मां धूमावती की पूजा विपत्ति से छुटकारा पाने,रोग नाश करने और युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए की जाती है वहीं इनकी पूजा करने से मनुष्य के संकटों का हरण होता हैं व उन्हें यदि किसी चीज का अभाव हैं तो वह दूर होता है।
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धूमावती माता के जन्म की कथा
पौराणिक मान्यता है कि एक बार जब माता पार्वती को तीव्र भूख लगी तो उन्होंने भगवान शिव से भोजन मांगा। उस समय वहां भोजन उपलब्ध नहीं था तो शिवजी ने उन्हें कुछ समय प्रतीक्षा करने को कहा। माता पार्वती ने कुछ समय तक प्रतीक्षा की लेकिन कुछ देर बाद उनकी भूख और ज्यादा बढ़ गयी जिस कारण वे और अधिक व्याकुल हो गयी। इसी व्याकुलता में देवी पार्वती भगवान शिव को ही निगल गईं। भगवान शिव को निगलते ही शिव के शरीर में स्थित समुंद्र मंथन का विष माता के शरीर को जलाने लगा जिस कारण उनके शरीर से धुआं निकलने लगा। मातारानी का शरीर धीरे-धीरे बूढ़ा होता चला गया और जगह-जगह झुर्रियां पड़ गयी। इससे बेचैन होकर माता पार्वती ने शिव को अपने मुहं से बाहर उगल दिया। बाहर आकर भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा कि चूंकि तुम भूख से व्याकुल होकर अपने पति को ही निगल गयी थी, इसलिए तुम्हारे इस रूप को विधवा होने का श्राप मिलेगा। एक अन्य कथा के अनुसार जब सती ने पिता के यज्ञ में स्वेच्छा से स्वयं को जलाकर भस्म कर दिया तो उनके जलते हुए शरीर से जो धुआं निकला,उससे धूमावती का जन्म हुआ। यानी धूमावती धुएं के रूप में सती का भौतिक स्वरूप है।

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