जीवन की शुरुआत से लेकर अंत तक लिया जाने वाला भगवान श्री राम का नाम और उनकी पूजा तो हम प्रतिदिन करते हैं, लेकिन उनके गुणों को शायद ही देखने, समझने और आत्मसात करने की कोशिश करते हैं। यह स्थिति तब है जब दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति अपने घर में राम जैसा पुत्र, सीता जैसी पत्नी, लक्ष्मण जैसा भाई और हनुमान जैसा सेवक पाना चाहता है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के यदि जीवन पर नजर दौड़ाएं और उनके गुणों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें तो हमारा जीवन सुखमय हो जायेगा।
भगवान श्री राम और उनकी लीला से जुड़ी 10 बड़ी बातें जो हर किसी को पता होना चाहिए
इन गुणों ने बनाया मर्यादा पुरुषोत्तम
भगवान ने अपने आदर्श चरित्र से मानवता को अमर बना दिया। उससे पूर्व सुर और असुर का ही नाम अधिक लिया जाता था। मानव का महत्व अब तक अज्ञात था। श्री राम जी ने अपने अलौकिक स्वभाव, अद्भुत कार्य, उत्तम शील, अद्वितीय वीरता, अनुकरणीय सहनशीलता, विनम्रता, धर्म-प्रियता, परोपकार, स्वार्थ-त्याग आदि से जन-जन के मानस में अपना अधिकार जमा लिया था। यही कारण है कि अपने जीवनकाल में ही वे परम पूज्य हो गये थे और उसके बाद उत्तरोत्तर उनके प्रति श्रद्धा भक्ति भावना में विकास होता गया।
राम के गुणों की लीला
ईश्वर के अवतार से जुड़ी ‘लीला’ की जो प्रभु श्री राम के भक्तों की अनूठी परिकल्पना है। जिसमें सिर्फ और सिर्फ आनंद है। प्रभु श्रीराम के जीवन और उनके गुणों से जुड़ी रामलीला भारत ही नहीं दुनिया के तमाम हिस्सों में होती हैं। रामलीला में रामकथा का गायन और मंचन हमें सात्विक संस्कारों से अभिमंत्रित करता है।
कहते हैं कि श्री रामचरित मानस के प्रचार-प्रसार के लिए तुलसीदास ने रामलीला की शुरूआत की थी। हालांकि तुलसी की रामलीला के पहले भी रामकथा के गायन और उनके चरित्र के नाट्य स्वरूप का जिक्र मिलता है। जैसा कि बाल्मीकि रामायण में लवकुश रामकथा का गायन करते हैं। इसी तरह महाभारत में तथा हरिवंश पुराण में भी राम के चरित्र को लेकर नाटक का उल्लेख मिलता है।
क्या होती है लीला
पुराणों ने लीला में देवत्व को भी मानत्व में रूपांतरित किया है। भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को रामलीला के माध्यम से देखकर इसे सहज ही जाना जा सकता है। सही मायने में लीला का अर्थ होता है लीन होना।