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Sidhi Bus Accident: चोभरा दिग्विजय सिंह गांव में छाया मातम, किसी भी घर में नहीं चला चूल्हा

Sat, 25 Feb 2023 10:22 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीधी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीधी Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sat, 25 Feb 2023 10:22 PM IST
सार

चोभरा दिग्विजय सिंह गांव के आठ लोगों के अंतिम संस्कार के वक्त लोगों के रोने-बिलखने के सिवा चारों ओर कुछ भी न तो सुनाई दे रहा था न ही दिखाई दे रहा था।गांव में किसी भी घर में शनिवार के दिन खाना नहीं बनाया गया। सड़क दुर्घटना में आठ लोगों के जान गंवाने से हर कोई शोकाकुल है।

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mourning in Chobhra Digvijay Singh village After Sidhi Bus Accident
अंतिम संस्कार के दौरान परिजन और सूना पड़ा चोभरा गांव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में हृदय विदारक बस दुर्घटना के बाद से हर कोई विचलित है। रामपुर नैकिन थाना अंतर्गत चोभरा दिग्विजय सिंह गांव के सबसे अधिक बस में सवार आठ यात्री मारे गए हैं। इस हादसे से पूरे जिले के साथ-साथ पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

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चोभरा दिग्विजय सिंह गांव में किसी भी घर में शनिवार के दिन चूल्हा नहीं जला है, क्योंकि जिस तरह से आठ लोगों की मौत हुई है उससे हर कोई स्तब्ध है। इस घटना की वजह से किसी की मां का सिंदूर मिटा तो किसी के भाई का साथ छूट गया। वहीं, किसी की बहन अकेली हो गई, किसी की गोद सूनी हो गई तो किसी का बेटा इस दुनिया से दूर चला गया। 
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अंतिम संस्कार में उमड़ा जन सैलाब
आठ मृतकों का सोन नदी के भंवर सेन घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सिर्फ उसी गांव के ही नहीं बल्कि आसपास के दो-चार गांवों के लोग भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंचे। इस दौरान हर कोई अपने आप को नहीं रोक पा रहा था और अपनों को जाते हुए उनका मन काफी द्रवित और विचलित दिखा।

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mourning in Chobhra Digvijay Singh village After Sidhi Bus Accident
अंतिम संस्कार के दौरान परिजन - फोटो : अमर उजाला

रोते-बिलखते रहे लोग
एक ही गांव के आठ लोगों के अंतिम संस्कार के वक्त लोगों के रोने-बिलखने के सिवा चारों ओर कुछ भी न तो सुनाई दे रहा था न ही दिखाई दे रहा था। वहां मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि मेरे जीने का सहारा और मकसद दोनों ही मेरी जिंदगी से जा चुके हैं। मेरा बेटा चूड़ामन कोल भाजपा की रैली में गया तो जिंदा था, लेकिन वापस मैं उसका मुंह नहीं देख सका। शायद ईश्वर को यही मंजूर था। वहीं, मेरी पत्नी दयावती का रो-रो कर बुरा हाल है। वह बार-बार सिर्फ घर की चारदीवारी को देखते हुए छोटे-छोटे कह कर विलाप कर रही है।

उन्होंने कहा कि वह सिर्फ यही कहती है कि मेरा 20 साल का जवान बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। उसको लेकर के मैं बड़े-बड़े सपने देखा करती थी, जिसको अमित शाह की रैली ने चकनाचूर कर दिया।

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