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Himachal: इस टनल को बनाने में अंग्रेज इंजीनियर हुआ था फेल, एक रुपये जुर्माना लगने पर कर ली आत्महत्या

Wed, 21 Sep 2022 04:35 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Published by: Krishan Singh Updated Wed, 21 Sep 2022 04:35 PM IST
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सार
विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पूरी दुनिया में मशहूर है। इस ट्रैक में पड़ने वाली एक टनल ऐसी भी है जिसे बनाते वक्त एक अंग्रेज इंजीनियर ने अपनी जान दे दी थी। 
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world heritage Kalka-Shimla railway track, An English engineer had failed to build this Barog tunnel,  he comm
बड़ोग टनल - फोटो : संवाद

विस्तार

विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पूरी दुनिया में मशहूर है। इस ट्रैक में पड़ने वाली एक टनल ऐसी भी है जिसे बनाते वक्त एक अंग्रेज इंजीनियर ने अपनी जान दे दी थी। ये इंजीनियर थे कर्नल बड़ोग। इन्हीं के नाम पर इस ट्रैक पर बनी सबसे बड़ी सुरंग का नाम बड़ोग टनल रखा गया है। इस टनल को भूतिया टनल-33 के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि 1898 में शिमला-कालका रेलवे लाइन को लेकर अंग्रेजी सरकार ने योजना तैयार की। अंग्रेज शिमला में आकर बसना चाहते थे। इसीलिए इस ट्रैक को बनाने की तैयारी कर ली। पहाड़ पर ट्रैक बनाना आसान नहीं था। इसीलिए इंग्लैड से बड़े-बड़े इंजीनियर बुलाए गए। उन्हें इस ट्रैक को बनाने का जिम्मा सौंपा गया। इंजीनियर कर्नल बड़ोग भी इस टीम का हिस्सा थे। काम तेजी से शुरू हुआ और अंग्रेजी सरकार ने पूरी मशीनरी इस ट्रैक को बनाने में लगा दी।



 कालका से तेजी से काम शुरू हुआ। इसमें कहीं पुल तो कहीं छोटी सुरंगे बनाकर अंग्रेज इंजीनियर और कामगार आगे बढ़ रहे थे। तभी बड़ोग के पास ऐसा पहाड़ सामने आया कि बिना टनल बनाए यहां आगे बढ़ना संभव नहीं था। इसीलिए पहाड़ को काटते हुए लंबी टनल बनाने का फैसला लिया गया। कर्नल बड़ोग इस टीम की अगुवाई कर रहे थे। दोनों ओर से पहाड़ को काटना शुरू किया गया। टनल के दोनों सिरे आपस में मिल नहीं पा रहे थे। कई बार खुदाई की गई। इस पर खर्चा करीब 10 गुणा तक बढ़ गया। आखिरकार अंग्रेजी सरकार ने कर्नल बड़ोग को काम से रोक दिया।  बताया जाता है कि ब्रिटिश सरकार ने अंग्रेज इंजीनियर कर्नल बड़ोग पर एक रुपये का जुर्माना लगा दिया था। ये जुर्माना देना मुश्किल नहीं था लेकिन बात सम्मान की थी। ऐसे में कर्नल बड़ोग ने इसी टनल के अंदर जाकर आत्महत्या कर दी थी। उसके बाद हिमाचल निवासी बाबा भलकू ने इसका काम पूरा करवाया। लेकिन इस टनल के एक सिरे को अब बंद कर दिया गया है।


लोग डरते हैं टनल के पास जाने से
दावा किया जाता है कि इंजीनियर कर्नल बड़ोग की मौत के बाद यहां अप्रिय घटनाएं होने लगी थीं। कई लोगों को इंजीनियर की आत्मा दिखाई देने लगी। रात को कुछ लोग जब यहां से गुजरते तो उन्हें इंजीनियर के चिल्लाने तक की आवाज सुनाई देने लगी थी। स्थानीय लोगों ने रात के समय यहां से गुजरना तक बंद कर दिया। दावा है कि लोगों ने बाद में यहां पर पूजा-पाठ भी करवाया।  जिसके बाद यहां पर अब कुछ हद तक आवाजें बंद हुईं। हालांकि स्थानीय लोग आज भी इस टनल के आसपास जाने से डरते हैं। हालांकि, कुछ लोगों का दावा यह भी है कि यह आवाजें टनल के अंदर पानी की है। बड़ोग टनल इस ट्रैक पर सबसे लंबी सुरंग है। इस हैरिटेज ट्रैक से ही लाखों पर्यटक शिमला पहुंचते हैं। बड़ोग स्टेशन के पास इस घटना से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित की गई है।
 

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