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World Athletics Day: हादसे को निषाद ने नहीं माना अपना मुकद्दर, एक हाथ से ही छू लिया सफलता का आसमान
Sun, 07 May 2023 12:06 PM IST
Krishan Singh
गोपाल शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अंब (ऊना)
गोपाल शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अंब (ऊना)
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 07 May 2023 12:06 PM IST
सार
निषाद कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक प्रतियोगिता में ऊंची कूद में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। इसके पीछे उनकी और गरीब परिवार की मेहनत तो है, लेकिन जीत का जज्बा और विपरीत हालात को पछाड़कर सितारों को छू लेने की कहानी भी है।
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निषाद कुमार
- फोटो : संवाद
विस्तार
पैरालंपिक में निषाद कुमार की विश्व में पहचान है। पैरालंपिक में ऊंची कूद में वह टॉप रैंकिंग में हैं। हिमाचल के उपमंडल अंब के बदाऊं जैसे छोटे गांव से उठकर निषाद ने यह स्टारडम हासिल किया है। निषाद कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक प्रतियोगिता में ऊंची कूद में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। इसके पीछे उनकी और गरीब परिवार की मेहनत तो है, लेकिन जीत का जज्बा और विपरीत हालात को पछाड़कर सितारों को छू लेने की कहानी भी है। एक हादसा जो किसी भी साधारण आदमी के हौंसले को पस्त कर सकता है। उस हादसे को एक गरीब किसान के बेटे ने अपना मुकद्दर नहीं माना। बल्कि उसके बाद मेहनत और लग्न से वह मुकाम हासिल किया, जो बस कहानियों जैसा लगता है।
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निषाद ने अपने बचपन के एक हादसे के बाद हार नहीं मानी, बल्कि खेलकूद के लिए मूलभूत सुविधाओं और प्रशिक्षण की कमी वाले कस्बे के सरकारी स्कूल से सफर किया। अपने खेलों के सफर को ओलंपिक के विक्ट्री पोडियम तक पहुंचा दिया। महज छह वर्ष की उम्र में चारा काटते समय निषाद का हाथ घास काटने वाली मशीन में आ गया था। जिस कारण दाहिनी कलाई कटकर अलग हो गई। परिवार का इकलौता बेटा होने के कारण उसका हाथ कट जाना परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं था, लेकिन निषाद ने अपने साथ हुए हादसे को ही अपना मुकद्दर नहीं मान लिया। अपना ध्यान खेलों की तरफ केंद्रित किया और इसके लिए गरीबी के बावजूद खेलों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के लिए जमा दो कक्षा की पढ़ाई के बाद वह पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में पहुंच गया।
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बेटे को उच्च प्रशिक्षण देने के लिए मां ने दूध बेचा और पिता ने दिहाड़ियां लगाकर सहयोग दिया। कोच नसीम अहमद ने निषाद की प्रतिभा को पहचाना और उसकी खेल प्रतिभा को तराशा।
परिवार में गरीबी के हालात थे, लेकिन निषाद की मेहनत ने सब उलटफेर कर दिया। टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक जीतने के बाद निषाद पर पैसों की बरसात हो गई।