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क्या आपने भी पढ़ीं शिमला शहर की ये तीन बड़ी खबरें?

Thu, 15 Dec 2016 12:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 15 Dec 2016 12:27 PM IST
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Water Crisis in Shimla city Due to Pipe Leakage.

1. पानी की लीकेज रोकने में एमसी, आईपीएच फेल

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राजधानी शिमला को रोजाना डिमांड के मुकाबले करीब 60 लाख लीटर कम पानी की सप्लाई हो रही है। पानी की किल्लत के कारण शहर के लोगों को तीसरे दिन भी पानी नसीब नहीं हो पा रहा। शहर को पानी की सप्लाई करने वाली गिरि परियोजना में लीकेज के कारण शहर में जल संकट गहराया है। लीकेज रोकने में एमसी और आईपीएच फेल हो गए हैं।

अश्वनी खड्ड परियोजना के विकल्प के तौर पर तैयार की गई कोटी बरांडी परियोजना से भी बार बार लीकेज के कारण क्षमता के अनुसार शहर को पूरा पानी नहीं मिल पा रहा। शहर में रोजाना पानी की सप्लाई के लिए करीब 42 एमएलडी पानी की जरूरत रहती है। लेकिन शहर को रोजाना सप्लाई के लिए डिमांड के मुकाबले करीब 13 एमएलडी पानी कम मिल रहा है।
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राशनिंग के दौरान एक दिन छोड़ कर पानी की सप्लाई के लिए शहर को 35 एमएलडी पानी की जरूरत रहती है, लेकिन एक दिन छोड़ कर सप्लाई के लिए भी शहर को करीब छह एमएलडी कम पानी मिल रहा है। ऐसे में रोजाना करीब 60 लाख लीटर पानी कम मिलने के कारण शहर में पानी का डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम पूरी तरह गड़बड़ा गया है। पानी की किल्लत के कारण नगर निगम को रोजाना पानी की सप्लाई में क्षेत्रवार कट लगाना पड़ रहा है।
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गिरि में 200 मीटर लाइन बदलने का काम शेष
गिरि परियोजना में लीकेज की समस्या के स्थायी समाधान के लिए की करीब दो हजार मीटर लाइन को बदल दिया गया है। 200 मीटर लाइन बदलने का काम शेष बचा है। काम पूरा होने के बाद शहर को पर्याप्त मात्रा में पानी की सप्लाई मिलना शुरू हो जाएगी। गुम्मा परियोजना की पाइपलाइन बदलने के लिए भी योजना बनाई गइ है।- संजय चौहान, मेयर, नगर निगम शिमला

पानी की आपूर्ति का विवरण
गिरि परियोजना    6.49
गुम्मा परियोजना    16.21
चुरट परियोजना    2.81
चेयड़ परियोजना    1.19
कोटी-बरांडी        2.66
शहर को पानी की कुल आपूर्ति    29.36 एमएलडी

कोटी बरांडी परियोजना से हो रही क्षमता से आधी आपूर्ति
अश्वनी खड्ड परियोजना के विकल्प के रूप में तैयार की गई कोटी-बरांडी परियोजना से शहर को क्षमता के मुकाबले आधे पानी की ही आपूर्ति हो रही है। नगर निगम प्रशासन दावा कर रहा है कि इस परियोजना से शहर को रोजाना चार से पांच एमएलडी पानी की सप्लाई हो रही है जबकि बुधवार को कोटी बरांडी से शहर को महज 2.66 एमएलडी पानी की ही सप्लाई हुई है।

2. शिमला आइस स्केटिंग क्लब करेगा राष्ट्रीय चैंपियनशिप की मेजबानी
राजधानी शिमला के ऐतिहासिक आइस स्केटिंग रिंक को एक बार फिर से आइस स्केटिंग चैंपियनशिप की मेजबानी का मौका मिला है। इस बार चैंपियनशिप के लिए 3 से 6 जनवरी तक की तिथि प्रस्तावित की गई है। हालांकि चैंपियनशिप का होना न होना पूरी तरह से मौसम और रिंक में जमने वाली बर्फ पर निर्भर क रेगा। मेजबान आइस स्केटिंग क्लब के स्केटर्स का प्रदर्शन पूरी तरह से चैंपियनशिप शुरू होने से पहले मिलने वाले अभ्यास पर ही निर्भर करेगा। अभी तक रिंक में स्केटिंग करने के लिए बर्फ जम नहीं पाई है। इस कारण अभी तक एक भी सत्र नहीं हो पाया है।

राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पूरे देश से करीब साढ़े तीन सौ स्केटर्स के शिमला आने की संभावना है। जिसमें दिल्ली, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, पंजाब, चंडीगढ़, कर्नाटक सहित करीब बारह राज्यों से स्केटर्स आने की उम्मीद है। आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सचिव भवनेश बांगा और उपाध्यक्ष राजन भारद्वाज ने नेशनल चैंपियनशिप करवाए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इसमें स्पीड और फिगर दोनों की स्पर्धाएं होंगी, जो अलग-अलग आयु वर्ग में करवाई जाएंगी। पिछले साल के स्केटिंग सीजन से अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक विकसित किए गए रिंक में यह पहला मौका होगा, जब राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा की मेजबानी शिमला आइस स्केटिंग क्लब करेग।

आज हो सकता है पहला सत्र
शिमला आइस स्केटिंग रिंक में करीब डेढ़ सप्ताह से लगातार बर्फ जमाने के प्रयास किए जा रहे है, मगर अब तक एक भी सत्र संभव नहीं हो सका है। शिमला आइस स्केटिंग क्लब के सचिव भवनेश बांगा और कार्यकारिणी सदस्य राजन भारद्वाज का कहना है कि रात को बादल न हुए और आइस जमने को उपयुक्त तापमान रहा, तो वीरवार को सीजन का पहला सेशन करवाया जाएगा। यह आइस जमने पर ही निर्भर करेगा। पिछले साल के मुकाबले इस बार सीजन देरी से शुरू होगा। चूंकि 2015 में 12 दिसंबर से सत्र शुरू हो गया था। कभी इस रिंक में नवंबर माह अंत से भी स्केटिंग सत्र शुरू हो जाते थे।

इस बार नहीं बढ़ेंगी स्केटिंग अभ्यास, मेंबरशिप की फीस
पिछले साल आइस देरी से जमने के कारण मुश्किल से तीस सत्र ही संभव हो पाए थे। इसे देखते हुए शिमला आइस स्केटिंग क्लब ने इस बार सदस्यता शुल्क और पर्यटकों और शौकीनों से ली जाने वाली फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। क्लब के सीनियर सदस्य से 2500, 1500 और जूनियर से 1200, 1100 रुपये सदस्यता शुल्क और स्केट्स की फीस ही लेगा। जबकि पर्यटकों से सौ रुपये प्रति सत्र फीस वसूल की जाएगी। रविवार को सुबह ग्यारह से ढाई बजे के बीच में क्लब कार्यालय में सदस्यता शुल्क  लेने, नई सदस्यता लेने  और स्केट्स इशू करने का समय तय किया गया है।

ग्लोबल वार्मिंग माना जा रहा कारण
साल दर साल आइस स्केटिंग रिंक में बर्फ न जमने को मौसम और तापमान में ग्लोबल वार्मिंग के कारण आए बदलाव को ही माना जा रहा है। नवंबर माह में शुरू होने वाली स्केटिंग अब दिसंबर मध्य में भी शुरू नहीं हो पा रही है। करीब करीब एक माह का अंतर आ गया है।  

3. मेंटल अस्पताल पर सरकार से रिपोर्ट तलब
प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मेंटल हेल्थ एंड रिहेबिलिटेशन अस्पताल शिमला की बदहाल स्थिति के बारे में दी गई न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की रिपोर्ट पर 6 सप्ताह के भीतर स्टेट्स रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार को मेंटल हेल्थ एक्ट 1987 के तहत बने प्रावधानों और नियमों का सख्ती से पालन करने के आदेश भी दिए।

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कोर्ट को दी रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने 14 नवंबर को दिमागी तौर से बीमार लोगों के लिए शिमला में बने अस्पताल का दौरा किया था। उस दिन मौके पर एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के अलावा एक नर्स मौजूद थी। यह नर्स भी वहां डेपुटेशन पर तैनात थी। कोई भी नियमित कर्मचारी इस अस्पताल में नहीं पाया गया। मरीजों को शिमला की ठंड को नजरअंदाज करते हुए केवल एक एक सूती कंबल दिया गया था।


कोई भी ऊनी वस्त्र यहां दाखिल मरीजों को उपलब्ध नहीं करवाया गया था। वहां हालांकि पानी की टंकियां तो लगी हुई पाई गई लेकिन उनका रखरखाव और इस्तेमाल सही नहीं पाया गया। वहां पानी का भी दुरुपयोग हो रहा था। न्यायाधीश चौहान ने वहां के मरीजों को दिया जाने वाले खाने को भी घटिया किस्म का पाया। कोर्ट ने मामले के सभी प्रतिवादियों को रिपोर्ट में बताई गई इन सभी खामियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के आदेश भी दिए। मामले पर सुनवाई 2 मार्च को होगी।

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