वीरभद्र सिंह ने सीबीआई की जांच पर उठाए सवाल, दिए ये तर्क
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हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब हिमाचल सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं की है तो एजेंसी ने कैसे अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर स्वयं जांच शुरू कर दी।
ऐसे में उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द किया जाए। न्यायमूर्ति विपिन सांघी के समक्ष वीरभद्र सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जिरह की। सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों का हवाला देते हुए तर्क रखा कि सीबीआई ने इस मामले में संघीय ढांचे का उल्लंघन किया है।
सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करने से पहले किसी सक्षम प्राधिकारी से अनुमति नहीं ली, मुख्यमंत्री एक जनसेवक पद पर हैं और उनके खिलाफ बिना अनुमति प्राथमिकी दर्ज ही नहीं की जा सकती।
सिब्बल ने दी ये दलीलें
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर कार्रवाई के दौरान सीबीआई ने नियमों का पालन नहीं किया है। तय नियमों के उल्लंघन का मामला स्पष्ट है और ऐसे में प्राथमिकी आधारहीन व जांच गैरकानूनी है। अदालत ने अब मामले की सुनवाई 17 अक्तूबर को तय की है। अभी सिब्बल ही वीरभद्र सिंह का पक्ष रखेंगे।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कि सीबीआई राजनीति से प्रेरित होकर उनके खिलाफ जांच कर रही है। सीबीआई ने वीरभद्र उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह व अन्य पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने पर भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। वीरभद्र व उनकी पत्नी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है।