मनी लॉन्ड्रिंग केस: वीरभद्र के बेटे-बेटी के खिलाफ कोर्ट पहुंची ईडी
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाईकोर्ट से हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र व पुत्री के खिलाफ कार्रवाई पर लगाई अंतरिम रोक हटाने के लिए आवेदन दायर किया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 22 सितंबर तय की है।
अब इस मामले में वीरभद्र सिंह के बेटे-बेटी अपना पक्ष रखेंगे। मुख्य न्यायमूर्ति जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढिंगरा सहगल की खंडपीठ के समक्ष ईडी की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सालिसीटर जनरल संजय जैन ने पेश जवाब में कहा कि अब तक दोनों के खिलाफ ईडी ने मनी लॉंड्रिंग नियमों के आधार पर कार्रवाई की है।
जैन ने कहा कि ईडी ने सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ही दोनों के खिलाफ प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट दर्ज की है। इसमें दोनों का नाम नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
ईडी के फैसले को सीएम के बेटा-बेटी ने दी है चुनौती
इससे पूर्व हाईकोर्ट ने 26 अप्रैल को अपने अंतरिम आदेश में दोनों के खिलाफ संपत्ति जब्ती संबंधी ईडी के निर्णय को तो बहाल रखा था, लेकिन उसके बाद की जाने वाली कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
पेश मामले में वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य सिंह व बेटी अपराजिता कुमारी दोनों ने ईडी द्वारा मनी लॉंड्रिंग मामले में उनकी संपत्ति जब्त करने के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि ईडी का आदेश गलत तरीके से जारी किया गया है।
दोनों ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 5 (1) में हाल ही में किए गए संशोधन को भी चुनौती दी है। याची ने कहा कि यह विरोधाभासी है और संविधान का उल्लंघन है।
याचिका में ईडी द्वारा पीएमएलए के तहत 23 मार्च 2016 को जारी प्रोविजनल जब्त आदेश को निरस्त करने की मांग करते हुए बताया गया है कि ईडी ने अपराजिता की करीब 15.85 लाख रुपये की अचल संपत्ति व विक्रमादित्य की तकरीबन 62.80 लाख रुपये की संपत्ति को जब्त किया है।