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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Virbhadra Singh became MP at the age of 27 in 1962 and remained cm for the most number of times after Jyoti Basu

वीरभद्र सिंह: 28 साल की उम्र में बने थे एमपी, ज्योति बसु के बाद सबसे ज्यादा बार रहे सीएम

Thu, 08 Jul 2021 10:47 PM IST
Krishan Singh सुभाष सेन, अमर उजाला, रामपुर बुशहर
सुभाष सेन, अमर उजाला, रामपुर बुशहर Published by: Krishan Singh Updated Thu, 08 Jul 2021 10:47 PM IST
सार

पांच बार लगातार सांसद और छह बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड केवल वीरभद्र सिंह के नाम रहा है। वे आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लिए मसीहा की तरह कार्य करते थे। बताया जाता है कि वीरभद्र सिंह के दरबार में जो भी फरियादी आता था, वह कभी निराश और खाली हाथ नहीं लौटता था।

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Virbhadra Singh became MP at the age of 27 in 1962 and remained cm for the most number of times after  Jyoti Basu
पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के साथ वीरभद्र सिंह(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

13 वर्ष की छोटी आयु में बुशहर रियासत की राजगद्दी संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वर्ष 1962 में महासू सीट से 28 वर्ष की आयु में पहला चुनाव लड़ा था। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु के बाद वीरभद्र सिंह सबसे अधिक छह बार मुख्यमंत्री रहे। बसु आठ बार सीएम रह चुके हैं। वीरभद्र सिंह पिछले 59 साल तक राजनीति में सक्रिय रहे। लंबा राजनीतिक सफर तय कर चुके वीरभद्र सिंह का नाम बच्चे-बच्चे की जुबान पर है।

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पांच बार लगातार सांसद और छह बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड केवल वीरभद्र सिंह के नाम रहा है। वे आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लिए मसीहा की तरह कार्य करते थे। बताया जाता है कि वीरभद्र सिंह के दरबार में जो भी फरियादी आता था, वह कभी निराश और खाली हाथ नहीं लौटता था। वे ऐसे मुख्यमंत्री रहे, जिन्होंने प्रदेश के विभिन्न दुर्गम स्थलों पर जाकर लोगों के दुख दर्द को समझा। रामपुर, रोहडू और किन्नौर विधानसभा क्षेत्र में बिछा सड़कों का जाल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की देन है। 
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वर्ष 1962 में महासू से जब वीरभद्र सिंह एमपी का चुनाव लड़ रहे थे, तो उनके साथ प्रचार का जिम्मा संभालने वाले  पूर्व अधिकारी 77 साल के आत्मा राम केदारटा बताते हैं कि वीरभद्र सिंह इकलौते ऐसे नेता है, जिन्होंने पूरे प्रदेश में पैदल चलकर लोगों का दुख दर्द जाना। उनकी खासियत थी कि यदि कोई भी जरूरतमंद मदद मांगता तो वह कभी मना नहीं करते थे। यहां तक कि उन्होंने हॉलीलाज स्थित अपने आवास पर तैनात सुरक्षा कर्मियों और अपने स्टाफ को भी लोगों की मदद करने के निर्देश दिए थे।  

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पिता वीरभद्र के अंतिम समय में साथ नहीं थे विक्रमादित्य 

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जब आखिरी सांस ली तो उस वक्त पुत्र विक्रमादित्य सिंह पिता के पास नहीं थे। विधायक विक्रमादित्य सिंह बुधवार को पिता वीरभद्र सिंह के लिए प्रार्थना करने कुलदेवी मां भीमाकाली के मंदिर सराहन पहुंचे थे। यहां मां भीमाकाली की संध्या आरती में पिता के स्वास्थ्य लाभ के लिए पूजा-अर्चना की। गुरुवार को उन्हें कामरु, किन्नौर जाकर देवता से प्रार्थना करनी थी।  सराहन अपने महल में रुके विक्रमादित्य सिंह सुबह पिता के निधन की सूचना मिलते ही शिमला रवाना हुए।

वीरभद्र सिंह के निधन के बाद सराहन में उनकी कुल देवी मां भीमाकाली के कपाट रविवार तक बंद हो गए हैं। पातक के कारण कुलदेवी की पूजा रविवार तक बंद हो गई है। मंदिर में माता की पूजा न हो, ऐसा काफी लंबे समय बाद हो रहा है। सराहन कांग्रेस कार्यकर्ता ज्योति लाल मेहता, भानू प्रताप, राजेश लारजू, जय सिंह मेहता, हीरा लाल सोनी और उमेश आर्य ने बताया वीरभद्र सिंह जैसे इंसान और नेता की क्षतिपूर्ति करना नामुमकिन है। उन्होंने बताया कि विक्रमादित्य सिंह माता के मंदिर में पिता के लिए प्रार्थना करने सराहन पहुंचे थे। वीरवार को उनकी कामरु किन्नौर मंदिर में भी पिता के लिए पूजा अर्चना करने की योजना थी।

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