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विक्रमादित्य बोले- वचन देता हूं आजीवन राजा साहब की सोच पर चलूंगा
Sat, 10 Jul 2021 09:16 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर(शिमला)
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर(शिमला)
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 10 Jul 2021 09:16 PM IST
सार
वीरभद्र सिंह के पार्थिव शरीर के सामने पद्म पैलेस में उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह का राज तिलक हुआ। इसी के साथ उन्हें बुशहर रियायत का 123वां राजा चुन लिया गया।
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विक्रमादित्य सिंह को सांत्वना देते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अपने पिता राजा वीरभद्र सिंह की अंत्येष्टि के बाद उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह ने कहा - मैं आज वचन देता हूं कि आजीवन राजा साहब की सोच पर चलूंगा। प्रदेश को लेकर राजा साहब के जो सपने थे, उन्हें पूरा करने का हरसंभव प्रयास करूंगा। इसमें कई कठिनाइयां और उतार-चढ़ाव आएंगे, लेकिन फिर भी पीछे नहीं हटूंगा। राजा साहब ने हिमाचल प्रदेश को एक सूत्र में बांधा था। देवी-देवताओं के प्रति राजा साहब की अटूट आस्था थी, मैं भी उसे पूरा जीवन कायम रखूंगा।
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बुशहर रियासत के 123वें राजा बने विक्रमादित्य
वीरभद्र सिंह के पार्थिव शरीर के सामने पद्म पैलेस में उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह का राज तिलक हुआ। इसी के साथ उन्हें बुशहर रियायत का 123वां राजा चुन लिया गया। बुशहर रियासत भगवान कृष्ण की वंशावली से संबंधित मानी जाती है। शनिवार सुबह विक्रमादित्य सिंह को पीपल के पेड़ के नीचे राजगद्दी पर बैठाया गया। यह प्रक्रिया परदे में हुई। इस दौरान राजगद्दी कक्ष में केवल राजपरिवार के चुनिंदा लोगों और पुरोहितों को ही अंदर जाने की अनुमति रही। दोपहर बाद जैसे ही वीरभद्र सिंह की पार्थिव देह बाहर लाई गई तो उन्हें महल के भीतर राज सिंहासन पर बैठाया गया।
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