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धूमल समेत कई नेताओं को क्लीन चिट!

Wed, 04 Jun 2014 03:55 PM IST
Updated Wed, 04 Jun 2014 03:55 PM IST
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Vigilance can give clean chit to politicians including ex CM

विजिलेंस को सबसे पहले पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल का केस बंद करना पड़ रहा है। धूमल पर दो पैन कार्ड रखने के आरोप लगे थे। इस मामले की जांच सरकार ने विजिलेंस को सौंपी थी।

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जांच में विजिलेंस को कोई भी ऐसे साक्ष्य नहीं मिले जिससे दो पैन कार्ड रखने की बात साबित होती हो। इस मामले की जांच की फाइल भी विजिलेंस बंद करने जा रहा है।
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डीआईजी विजिलेंस एपी सिंह ने बताया कि टंकण की गलती के कारण नंबर बदले गए लग रहे हैं। जांच में ऐसे कोई भी गैरकानूनी साक्ष्य नहीं मिले हैं।

इनके खिलाफ भी हाथ खाली

Vigilance can give clean chit to politicians including ex CM

स्टेट विजिलेंस को भाजपा के पूर्व बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा और पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सुखराम चौधरी से जुड़े मामलों में भी कोई साक्ष्य नहीं मिले है। कांग्रेस चार्जशीट आधारित इन मामलों की जांच पूरी कर विजिलेंस ने क्लोजर रिपोर्ट बना दी है।

नरेंद्र बरागटा पर आरोप लगे थे कि उन्होंने गुम्मा स्थित कार्टन फैक्टरी की मशीनरी को चहेतों को कौड़ियों के दाम बेचा और फैकटरी में करोड़ों के कार्टन सड़ गए थे। दोनों ही आरोपों में विजिलेंस के हाथ ऐसे साक्ष्य नहीं मिले जो इन्हें साबित कर सके।

इसके अलावा पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सुखराम चौधरी पर घर के समीप पुराने ट्यूबवेल की मरम्मत करवाकर उसे नया बताकार 4 लाख की सब्सिडी लेने के अरोप लगाए थे।

अन्य मामलों में भी ठंडी पड़ी जांच

Vigilance can give clean chit to politicians including ex CM

इन दो मामलों के अलावा जांच ऐजेंसी ने छह मामलों को भी सरकार को भेजा है। जांच में राजस्व संबंधी खामियां सामने आने के कारण एजेंसी ने इन्हें वापस किया है। इनमें ऊना में पेपर मिल के नाम पर खरीदी भूमि में करोड़ों की अनियमितताओं का आरोप लगाया था।

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि जमीन की खरीद में 118 धारा का उल्लंघन हुआ है। जिसकी जांच राजस्व विभाग के तहत आती है। इसी तरह प्रशांत भूषण मामले में भी राजस्व संबंधी अनियमितताएं सामने आई है। भूषण पर शैक्षणिक संस्थान के नाम पर जमीन लेने के बावजूद वहां पर किसी शैक्षणिक संस्थान के नहीं चलने के आरोप लगे है।

धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम में आईपीएल मैच करवाने पर सिक्योरिटी मनी नहीं लेने से सरकार को करोड़ों के घाटे के आरोप के मामले को भी विजिलेंस ने सरकार को भेज दिया है। अब यह फैसला सरकार पर छोड़ दिया है कि उन्हें आयोजकों से सिक्योरिटी मनी लेना है या नहीं।

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