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अंग्रेजी मेम ने पति के बगल में दफन होने के लिए 38 साल किया मौत का इंतजार
Mon, 15 Feb 2021 11:14 AM IST
अरविन्द ठाकुर
संजय भारद्वाज, अमर उजाला नेटवर्क, नाहन (सिरमौर)
संजय भारद्वाज, अमर उजाला नेटवर्क, नाहन (सिरमौर)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 15 Feb 2021 11:14 AM IST
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नाहन शहर के विल्ला राउंड में अंग्रेज अफसर व उनकी पत्नी की कब्र।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रेम सच्चे मन से किया जाए तो वह प्रेमगाथा बन जाती है। सिरमौर जिले का नाहन शहर ऐसी ही एक प्रेम गाथा के लिए प्रसिद्ध है। रियासतकाल में अपने पति से बेपनाह प्रेम करने वाली अंग्रेजी मेम लूसिया ने पति की कब्र के साथ दफन होने के लिए 38 वर्ष तक इंतजार किया। देश आजाद हुआ तो भी लूसिया वापस इंग्लैंड नहीं गईं। नाहन शहर के विल्ला राउंड स्थित कैथोलिक कब्रगाह में अंग्रेजी अफसर डॉ. इडविन पियरसाल और उनकी पत्नी लूसिया की कब्रें अमरप्रेम की गवाही दे रही हैं।
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लूसिया ने पति की कब्र के साथ दफन होने के लिए 38 साल तक मृत्यु का इंतजार किया। लूसिया के पति डॉ. इडविन पियरसाल महाराज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी थे। वह उस जमाने में नगर परिषद के अध्यक्ष भी रहे। डॉ. पियरसाल ने महाराज के यहां करीब 11 साल सेवाएं दीं। 19 नवंबर, 1883 में डॉ. इडविन का 50 साल की उम्र में देहांत हो गया। महाराज ने डॉ. पियरसाल को मिल्ट्री ऑनर के साथ ऐतिहासिक विला राउंड के उत्तरी हिस्से में दफन करवाया।
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वर्तमान में यह इलाका विल्ला राउंड नाम की प्रमुख सैरगाह के रूप में विख्यात है। उस वक्त अंग्रेज अफसर की पत्नी लूसिया 49 साल की थीं। डॉ. पियरसाल की तरह लूसिया भी रहमदिल और रियासत में लोकप्रिय महिला थीं। पति की मौत के बाद लूसिया इंग्लैंड नहीं गईं। परिवार के सदस्यों को भी छोड़ दिया और यहीं रहने लगीं। उनकी इच्छा पति की कब्र के साथ ही दफन होने की थी। 38 साल बाद 19 अक्तूबर, 1921 को लूसिया इस दुनिया को अलविदा कह गईं।
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लूसिया की अंतिम इच्छा पूरी कर महाराज ने पति की कब्र के समीप ही दफनाया। महाराजा के राज वंशज एवं पूर्व विधायक कंवर अजय बहादुर सिंह ने बताया कि लूसिया ने 38 साल तक यहीं रहकर मृत्यु का इंतजार किया। डॉ. पियरसाल रियासतकाल में बेहतरीन आर्किटेक्ट भी थे। नाहन में अंडरग्राउंड ड्रेनेज की राय उन्हीं ने दी थी। शहर की गलियों का डिजाइन भी उन्हीं का बनाया है।