हिमालयी राज्यों के लिए स्थायी विकास योजना जरूरी: किरन रिजिजू
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हिमालयी क्षेत्र बहुत ही कोमल है, जहां अगर बिना तैयारी और प्लान के सिर्फ लालच के लिए विकास योजनाएं शुरू की गईं तो यह इस क्षेत्र के लोगों के लिए घातक होगा। इसलिए जरूरी है कि हम समग्र रूप से स्थायी विकास योजना तैयार कर उसके अनुरूप काम करें।
यह बात केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने शिमला के पीटर हॉफ होटल में हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और राजनेताओं के कॉनक्लेव के दौरान कही।
हिमकास्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में रिजिजू ने कहा कि पर्याप्त तैयारी के साथ ही विकास होना चाहिए, ताकि हिमालय और हम दोनों बच सकें। कहा कि लोगों की जीवनशैली को और बेहतर बनाने का लक्ष्य हमेशा ध्यान में रखना जरूरी है।
उम्मीद जताई कि इस कॉनक्लेव में वैज्ञानिक आधार से इतर राजनीतिक तौर पर चर्चा होने के बाद ठोस निर्णय होंगे, जिससे हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर नतीजे देखने को मिलेंगे।
एेसी स्थिति में हिमालय को बचाना संभव नहीं
नेपाल के काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट से आए एकलव्य शर्मा ने कहा कि अफगानिस्तान से लेकर म्यांमार तक के इस क्षेत्र को बचाने के लिए जब तक सरकार, आम लोग साथ काम नहीं करेंगे, तब तक हिमालय को बचाना संभव नहीं।
जलवायु परिवर्तन से हिमखंड पिघल रहे हैं और उत्तराखंड की आपदा भी उसी जलवायु परिवर्तन का एक उदाहरण थी। इस अवसर पर सिक्किम के कृषि मंत्री सोमनाथ पौडयाल, हिमाचल के कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा और मणिपुर के कृषि मंत्री वी हंगखलियन ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह समेत कई अन्य प्रदेशों से आए सांसद, विधायक व अधिकारी मौजूद रहे।